नागोया (जापान):

जापान के नागोया में आयोजित एशियन गेम्स 2026 के एथलेटिक्स ट्रैक पर भारतीय खेलों के इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय लिखा गया। पुरुषों के हाई जंप (ऊंची कूद) इवेंट में भारत के सर्वेश कुशारे ने 2.25 मीटर की शानदार छलांग लगाकर सिल्वर (रजत) मेडल अपने नाम कर लिया। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ ही एशियन गेम्स की पुरुष हाई जंप स्पर्धा में भारत का 56 सालों से चला आ रहा मेडल का सूखा आखिरकार समाप्त हो गया।

एशियन गेम्स में इससे पहले भारत को पुरुषों की हाई जंप में आखिरी पदक वर्ष 1970 के बैंकॉक एशियन गेम्स में मिला था, जब भीम सिंह ने 2.03 मीटर की कूद के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता था। 1970 के बाद से अब तक कोई भी भारतीय पुरुष एथलीट इस स्पर्धा में पोडियम तक नहीं पहुंच सका था।

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गोल्ड मेडल से बाल-बाल चूके

फाइनल मुकाबले में पहले स्थान के लिए बेहद कड़ा और रोमांचक मुकाबला देखने को मिला:

  • सर्वेश कुशारे का प्रदर्शन: सर्वेश ने 2.10m, 2.14m, 2.18m, 2.22m और 2.25m की बाधा को पहली ही कोशिशों में सफलतापूर्वक पार किया। हालांकि, वे 2.28 मीटर की ऊंचाई को अपनी तीनों कोशिशों में पार करने से चूक गए।
  • गोल्ड मेडल: चीनी ताइपे (Chinese Taipei) के चाओ-ह्सुआन फू ने भी 2.25 मीटर की ही ऊंचाई पार की, लेकिन काउंटबैक नियमों में कम प्रयास लेने के कारण उन्हें गोल्ड मेडल मिला और सर्वेश को सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा।
  • ब्रॉन्ज मेडल: दक्षिण कोरिया के स्टार जम्पर सांगह्योक वू 2.22 मीटर की कूद के साथ तीसरे स्थान पर रहे और कांस्य पदक जीता।

हांगझोउ का अधूरा सपना नागोया में हुआ पूरा

सर्वेश कुशारे के लिए यह मेडल बेहद भावुक करने वाला क्षण है। हांगझोउ एशियन गेम्स (2023) में वे 2.26 मीटर की छलांग लगाने के बावजूद तकनीकी अंतर के कारण चौथे स्थान पर रहकर मेडल से बाल-बाल चूक गए थे। हालांकि, साल 2026 के राष्ट्रमंडल खेलों (Commonwealth Games) में सिल्वर मेडल जीतने के बाद अब नागोया एशियन गेम्स में भी सिल्वर जीतकर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी निरंतरता (consistency) साबित की है।

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प्याज किसान का बेटा, जो बना भारतीय सेना का गौरव

महाराष्ट्र के नासिक जिले के देवरगांव में 17 जून 1995 को जन्मे सर्वेश कुशारे की सफलता किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है:

  • खेतों में बनाई मैट: सर्वेश एक साधारण प्याज किसान के बेटे हैं। बचपन में जब आधुनिक ट्रेनिंग और लैंडिंग मैट जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं, तब उनके पिता खेत के कचरे, मक्के के छिलकों और कपास को मिलाकर लैंडिंग पिट (गड्डा) तैयार करते थे, ताकि छलांग लगाने के बाद बेटे को चोट न लगे।
  • पिता ही बने पहले गुरु: पिता के मार्गदर्शन और अटूट मेहनत के दम पर आगे बढ़ते हुए सर्वेश भारतीय सेना में भर्ती हुए।
  • भारतीय सेना में सेवा: वर्तमान में सर्वेश कुशारे भारतीय सेना की 101 फील्ड रेजिमेंट में नायब सूबेदार के पद पर तैनात होकर देश सेवा कर रहे हैं।