सहारनपुर/लखनऊ:

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर कचहरी परिसर स्थित एक ऐतिहासिक मस्जिद के हिस्से पर प्रशासनिक बुलडोजर चलाए जाने के बाद राज्य का सियासी पारा अचानक चढ़ गया है। 16 जुलाई 2026 को सिटी मजिस्ट्रेट द्वारा निर्माण को अवैध घोषित किए जाने के बाद, 2 सितंबर को जिला अदालत ने मस्जिद कमेटी की अपील खारिज कर दी थी, जिसके बाद शनिवार तड़के प्रशासनिक टीम ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को अंजाम दिया। इस कदम के बाद समाजवादी पार्टी, AIMIM और मुस्लिम धर्मगुरुओं ने योगी सरकार पर हमला बोल दिया है।

अखिलेश यादव का हमला: "दूसरों का अपमान करने वाले सनातनी नहीं हो सकते"

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस कार्रवाई की तीखी आलोचना करते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठाए:

  • सनातनी मूल्यों का हवाला: अखिलेश ने कहा कि जो दूसरे धर्मों का सम्मान नहीं करते और दूसरों की आस्था से खिलवाड़ करते हैं, वे कभी सच्चे सनातनी नहीं हो सकते। सच्चा हिंदू कभी किसी का अपमान नहीं करता।
  • ऊपरी अदालत जाने का मौका न देना: उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने सरकार के इशारे पर जल्दबाजी में कार्रवाई की ताकि मस्जिद कमेटी को हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट से न्याय और स्टे न मिल सके।
  • ध्यान भटकाने की साजिश: सपा प्रमुख ने दावा किया कि अयोध्या में प्रभु श्री राम के चढ़ावे और धन की चोरी के मामलों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए इस मुद्दे को सांप्रदायिक रंग दिया जा रहा है।

असदुद्दीन ओवैसी का आरोप: "सुबह 5 बजे नाकाबंदी कर तोड़ी मस्जिद"

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सरकार पर संविधान की धज्जियां उड़ाने का आरोप लगाया:

  1. जल्दबाजी पर सवाल: ओवैसी ने पूछा कि आखिर इतनी जल्दी क्या थी कि सुबह 5 बजे ही इलाके की नाकाबंदी कर मस्जिद गिरा दी गई? सरकार को मामला हाई कोर्ट में जाने का इंतजार करना चाहिए था।
  2. 'टी-फैक्टर' और नफरत का माहौल: ओवैसी ने कहा कि यूपी में संविधान के टुकड़े किए जा रहे हैं और मस्जिदों को देखते ही भेदभाव शुरू हो जाता है। आगामी चुनावों में जनता इसका मुंहतोड़ जवाब देगी।

धर्मगुरुओं की प्रतिक्रियाएं और ऐतिहासिक दस्तावेज का दावा

प्रमुख व्यक्तित्व / धर्मगुरुवक्तव्य एवं प्रमुख मांग
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी (अध्यक्ष, ऑल इंडिया मुस्लिम जमात)मस्जिद का निर्माण 1910 (ब्रिटिश काल) में हुआ था। पुराने दस्तावेज खारिज कर बुलडोजर चलाया गया। मस्जिद को दोबारा बनाने की मांग की।
शिया धर्मगुरु यासूब अब्बास1947 से पहले के धर्मस्थलों की स्थिति बनाए रखने के संवैधानिक नियम का उल्लंघन। जनता इस बार बदलाव के पक्ष में है।

मुस्लिम जमात के अध्यक्ष शहाबुद्दीन रजवी ने दावा किया कि 1910 से 2026 तक यह स्थान मस्जिद के रूप में उपयोग में था और इसके वैध दस्तावेज प्रशासन को दिखाए गए थे, जिन्हें अधिकारियों ने अनदेखा कर दिया। घटना के बाद क्षेत्र में सतर्कता बढ़ा दी गई है।