उत्तर प्रदेश के सहारनपुर स्थित कलेक्ट्रेट परिसर में मस्जिद पर हुई प्रशासनिक कार्रवाई के बाद रविवार (6 सितंबर) को मलबा हटाने के दौरान एक 20 से 25 फीट गहरा पुराना कुआं मिला है। भारी स्लैब को कटर से काटकर हटाए जाने के बाद सामने आए इस कुएं ने इस पूरे मामले में एक नया मोड़ ला दिया है।
घटनाक्रम और प्रमुख प्रतिक्रियाएं
- प्रशासन का रुख: एसडीएम सदर सुबोध कुमार ने स्पष्ट किया कि कुएं की वास्तविक उम्र और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का पता लगाने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट के बाद ही स्थिति साफ होगी।
- हिंदू पक्ष का दावा: बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी ने कहा कि कुआं सैकड़ों साल पुराना हो सकता है। हिंदू परंपरा में मंदिर परिसरों में कुओं का धार्मिक महत्व रहा है, जिससे यहां प्राचीन मंदिर होने की संभावना को बल मिलता है।
- मुस्लिम पक्ष व सांसद का तर्क: सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि पुरानी मस्जिदों में वजू (हाथ-पैर धोने) के लिए पानी के स्रोत के रूप में कुएं होना बेहद सामान्य बात है। उन्होंने इस विषय पर कानूनी लड़ाई लड़ने की बात कही है।
मामले के मुख्य बिंदु
- कुएं की संरचना: पोकलैंड मशीन से जब स्लैब नहीं हटा, तब कटर का इस्तेमाल कर रास्ता साफ किया गया, जिसके नीचे कुआं दिखाई दिया।
- विवाद की वजह: हिंदू पक्ष इसे धार्मिक अवशेष बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे वजू का सामान्य ढांचा मान रहा है।
- आगे की कार्रवाई: एएसआई की आधिकारिक रिपोर्ट आने तक प्रशासन मौके पर स्थिति को नियंत्रित रखेगा और जांच के आधार पर ही आगे कदम उठाएगा।





