मुंबई। वैश्विक तनाव और अनिश्चितताओं के बीच भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को भारी बिकवाली का दौर देखने को मिला। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 1,124 अंक (1.6%) टूटकर 72,800 के नीचे बंद हुआ, जो पिछले 6 महीनों (30 मार्च के बाद) का सबसे निचला स्तर है। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 भी 360 से अधिक अंक गिरकर 22,800 के करीब आ गया। इस भीषण गिरावट के कारण बीएसई (BSE) पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) लगभग ₹8 लाख करोड़ घटकर ₹474 लाख करोड़ रह गया।
बाजार का हाल: 30 में से 29 प्रमुख शेयर लाल निशान पर
सेंसेक्स की 30 में से 29 दिग्गज कंपनियों के शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। एलएंडटी (L&T) और पावर ग्रिड में सर्वाधिक 3% तक की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा अडानी पोर्ट्स, एचडीएफसी बैंक, हिंदुस्तान यूनिलीवर, रिलायंस इंडस्ट्रीज और एसबीआई के शेयर 2% से ज्यादा टूटे। इस चौतरफा गिरावट के बीच सिर्फ इंफोसिस ही एकमात्र ऐसा शेयर रहा जो बढ़त के साथ बंद हुआ।
स्मॉलकैप और मिडकैप इंडेक्स भी 2% तक लुढ़क गए, जबकि बाजार में उतार-चढ़ाव को मापने वाला इंडेक्स 'इंडिया विक्स' (India VIX) 12% उछलकर 14 के करीब पहुंच गया। निफ्टी पीएसयू बैंक में 3% और निफ्टी रियल्टी में 2% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।
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शेयर बाजार में बड़ी गिरावट के 6 प्रमुख कारण
- ईरान-अमेरिका तनाव गहराया: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के 7 दिवसीय युद्धविराम (सीजफायर) और होर्मुज स्ट्रैट खोलने के प्रस्ताव को ठुकराने के बाद मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव चरम पर पहुंच गया है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान के कड़े बयानों ने युद्ध की चिंताओं को और बढ़ा दिया है।
- कच्चे तेल की कीमतों में उछाल: सप्लाय चेन बाधित होने की आशंका से क्रूड ऑयल की कीमतें 2% उछलकर $107 प्रति बैरल के पास पहुंच गईं, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा है।
- अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बहु-वर्षीय उच्च स्तर पर: US 10-ईयर ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 5.2% के पार पहुंच गई, जो 2004 के बाद का उच्चतम स्तर है। बॉन्ड यील्ड बढ़ने से निवेशक इक्विटी जैसे जोखिम भरे परिसंपत्तियों से पैसा निकालकर सुरक्षित डेट मार्केट की ओर रुख कर रहे हैं।
- रुपया ऐतिहासिक निचले स्तर पर: डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के चलते भारतीय रुपया 28 पैसे टूटकर US डॉलर के मुकाबले 96.03 के स्तर पर बंद हुआ।
- विदेशी निवेशकों (FII) की बिकवाली: विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बिकवाली जारी रखी है। अकेले इस महीने अब तक भारतीय शेयर बाजार से ₹25,682 करोड़ से अधिक की निकासी की जा चुकी है।
- ग्लोबल मार्केट से कमजोर संकेत: एशियाई बाजारों में भी भारी गिरावट देखी गई। दक्षिण कोरिया का कोस्पी 3% और चीन का शंघाई कंपोजिट करीब 2% नीचे बंद हुआ।
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विशेषज्ञों की राय: बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य पूर्व संकट के लंबा खींचने, वैश्विक लिक्विडिटी में सख्ती और आरबीआई (RBI) की आगामी मौद्रिक नीति समिति की बैठक से पहले निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं। निकट भविष्य में बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की चाल ही बाजार की दिशा तय करेगी।
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