नई दिल्ली:

भारत में एलन मस्क की सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस Starlink की एंट्री को लेकर चल रही चर्चाओं और नियामक मंजूरियों के बीच एक बड़ी वैश्विक घटना सामने आई है, जिसने रणनीतिक विशेषज्ञों की चिंताएँ बढ़ा दी हैं। यूक्रेन में हाल ही में स्टारलिंक टर्मिनल्स पर अचानक लगाई गई पाबंदियों से वहां की सैन्य यूनिट्स और ड्रोन मिशनों को भारी रुकावटों का सामना करना पड़ा है, जिससे विदेशी प्राइवेट टेक्नोलॉजी पर निर्भरता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

यूक्रेन में क्या है पूरा मामला?

TOI की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेनी अधिकारियों और सैन्य विश्लेषकों का आरोप है कि स्टारलिंक पर लगाई गई ये पाबंदियां वाशिंगटन (अमेरिका) के उस कथित राजनीतिक दबाव से जुड़ी हैं, जिसमें यूक्रेन को रूसी तेल बुनियादी ढांचे पर हमले रोकने के लिए कहा गया था।

  • सैन्य अभियानों पर असर: जंग के दौरान अस्पतालों और सरकारी सेवाओं को जोड़ने वाला स्टारलिंक नेटवर्क अब पाबंदियों के चलते यूक्रेन के कॉम्बैट और ड्रोन ऑपरेशन्स को प्रभावित करता दिख रहा है।
  • विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया: यूक्रेनी नेतृत्व को सलाह देने वाले एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह तकनीकी व्यवधान किसी इत्तेफाक का हिस्सा नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक और कूटनीतिक दबाव का परिणाम है। हालांकि, मस्क का बचाव करने वालों का तर्क है कि ये पाबंदियां अमेरिकी सरकार द्वारा संचालित मिलिट्री-ग्रेड 'Starshield' से जुड़ी हो सकती हैं।

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भारत के लिए यह घटना क्यों है चेतावनी?

भारत में स्टारलिंक की कमर्शियल एंट्री को लेकर प्रक्रियाएं चल रही हैं, और एलन मस्क व भारतीय टेलीकॉम दिग्गजों के बीच प्रतिस्पर्धा व रेगुलेटरी फ्रेमवर्क को लेकर पहले भी बहस छिड़ चुकी है। ऐसे में यूक्रेन की घटना भारत के सामने एक बड़ी दुविधा पेश करती है:

  1. विदेशी नियंत्रण का जोखिम: तक्षशिला इंस्टीट्यूशन द्वारा जारी रिपोर्ट 'Starlink and Risks for India' में पहले ही यह चेतावनी दी गई थी कि किसी विदेशी प्राइवेट ऑपरेटर और एक व्यक्ति (एलन मस्क) के नियंत्रण वाली तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और डेटा संप्रभुता के लिए जोखिम पैदा कर सकती है।
  2. संकट के समय अनिश्चितता: भू-राजनीतिक तनाव या कूटनीतिक दबाव के तहत यदि सेवाएं बाधित होती हैं, तो देश का क्रिटिकल कम्युनिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर खतरे में पड़ सकता है।

फिलहाल भारत में स्टारलिंक ने जरूरी लाइसेंस और मंजूरियां हासिल कर ली हैं, लेकिन कमर्शियल ऑपरेशन्स शुरू करने से पहले अंतिम सिक्योरिटी क्लीयरेंस और स्पेक्ट्रम आवंटन का इंतजार किया जा रहा है। यूक्रेन के घटनाक्रम ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि डिजिटल युग में 'रणनीतिक स्वायत्तता' (Strategic Autonomy) देश की सुरक्षा के लिए सबसे सर्वोपरि है।

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