जमुई: जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर (PK) ने जमुई में कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से एमएलसी प्रत्याशी रजनीश रंजन के पक्ष में एक विशाल जनसभा को संबोधित करने के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए एनडीए सरकार पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 23 अक्टूबर को होने वाला स्नातक निर्वाचन किसी सरकार को बनाने या गिराने का चुनाव नहीं है, बल्कि यह मौजूदा व्यवस्था को जवाबदेह बनाने का एक सुनहरा अवसर है।

"सरकार के पास 202 विधायक, यह चुनाव व्यवस्था सुधारने का मौका"

प्रशांत किशोर ने एनडीए समर्थकों से अपील करते हुए कहा कि वर्तमान एनडीए सरकार के पास 202 विधायकों का मजबूत बहुमत है, जो अगले चार साल तक सत्ता में बनी रहेगी। ऐसे में यह चुनाव सरकार गिराने का नहीं, बल्कि सत्ता में बैठे लोगों को जनता के प्रति जवाबदेह बनाने का है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि जनता सम्राट चौधरी के नेतृत्व या बयानों से असहमत है, तो वे एनडीए प्रत्याशी के खिलाफ मतदान कर दिल्ली तक एक कड़ा संदेश पहुंचा सकते हैं।

यदि 15 वर्षों से लगातार जीत रहे एनके यादव जैसे नेताओं को जनता हराएगी, तो इसका सीधा असर राज्य के सभी विधायकों और सांसदों पर पड़ेगा और उनके मन में जनता के प्रति जवाबदेही का डर पैदा होगा।

सम्राट चौधरी के बयान पर आड़े हाथों लिया

भाजपा नेता सम्राट चौधरी के राम मंदिर से जुड़े बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए पीके ने कहा कि "400 वर्षों से राम को बेघर बताना और यह दावा करना कि मोदी जी ने उन्हें घर दिया, यह अहंकार की पराकाष्ठा है।" उन्होंने शिक्षकों, वित्त रहित शिक्षकों और स्नातक बेरोजगारों की बदहाली का जिक्र करते हुए चेताया कि आने वाले समय में केवल जाति और पांच किलो अनाज के नाम पर वोट नहीं मिलने वाला है।

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नीतीश कुमार की अनुपस्थिति और चुनाव आयोग पर सवाल

  • नीतीश कुमार की खामोशी: प्रशांत किशोर ने सवाल उठाया कि चुनाव अपने अंतिम चरण में है, लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एनडीए के किसी भी प्रत्याशी के समर्थन में अब तक एक शब्द नहीं बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि नीतीश कुमार के नाम पर वोट तो लिया गया, लेकिन बाद में उन्हें हाशिए पर धकेल दिया गया। आज हर जगह पोस्टरों से नीतीश कुमार गायब हैं और सिर्फ सम्राट चौधरी नजर आ रहे हैं, जो जेडीयू और बीजेपी के बीच गहरी असहमति को दर्शाता है।
  • चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली: पीके ने चुनाव आयोग पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि स्नातक चुनाव पहले अमूमन रविवार को होते थे, लेकिन इस बार इसे शुक्रवार को कराया जा रहा है ताकि मुस्लिम मतदाताओं की भागीदारी को कम किया जा सके। इसके अलावा उन्होंने चुनाव प्रक्रिया की अवधि और कथित रूप से 10-10 हजार रुपये देकर वोट खरीदने जैसे मामलों में आयोग के मूकदर्शक बने रहने पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी।

प्रशांत किशोर की दो बड़ी गारंटियां

जनसभा के दौरान पीके ने जनता को दो प्रमुख गारंटियां दीं:

  1. यदि जन सुराज समर्थित प्रत्याशी रजनीश कुमार चुनाव जीतते हैं, तो संगठन कोसी क्षेत्र के 10,000 युवाओं को निजी क्षेत्र में रोजगार दिलाने की पूरी जिम्मेदारी लेगा।
  2. आगामी लोकसभा चुनाव से पहले यदि सभी शिक्षकों को सातवां वेतनमान नहीं दिलाया गया, तो जन सुराज दोबारा वोट मांगने नहीं आएगा।

अंत में उन्होंने दावा किया कि कोसी में सीधी लड़ाई जन सुराज और एनडीए के बीच है। जिस प्रकार तिरहुत में एनडीए को हार का सामना करना पड़ा था, उसी प्रकार इस बार सभी स्नातक सीटों पर एनडीए को पराजय का मुंह देखना पड़ेगा।

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