नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा जारी 'स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026' की ताजा रैंकिंग ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में प्रदूषण और हवा की गुणवत्ता की वास्तविक तस्वीर पेश कर दी है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में दिल्ली की आबोहवा अपने पड़ोसी शहरों गाजियाबाद और फरीदाबाद से भी खराब पाई गई है। हालांकि, दिल्ली के पंजाबी बाग और रोहिणी-A वार्डों ने बेहतरीन प्रदर्शन कर दिल्लीवासियों को राहत की सांस दी है।
NC-शहरों की रैंकिंग: कौन कहां खड़ा है?
- गाजियाबाद (9वीं रैंक): 184 अंकों के साथ देश के टॉप-10 स्वच्छ हवा वाले बड़े शहरों में शामिल। गाजियाबाद ने लगातार सुधार करते हुए 2024 में 18वें और 2025 में 12वें स्थान से छलांग लगाकर 9वां स्थान हासिल किया है।
- फरीदाबाद (14वीं रैंक): दिल्ली की तुलना में बेहतर स्थिति दर्ज करते हुए 14वें स्थान पर रहा।
- दिल्ली (21वीं रैंक): बड़े शहरों में प्रदूषण के स्तर के कारण गाजियाबाद और फरीदाबाद से नीचे पिछड़कर 21वें स्थान पर पहुंच गई है।
एमसीडी के दो वार्ड चमके, दिल्ली को मिला 5वां स्थान भले ही दिल्ली का ओवरऑल शहर का स्कोर कम रहा हो, लेकिन वार्ड लेवल की रैंकिंग में दिल्ली ने 5वां स्थान हासिल किया है।
- दिल्ली के सबसे स्वच्छ वार्ड: दिल्ली नगर निगम (MCD) के पंजाबी बाग और रोहिणी-A वार्डों की हवा को सबसे क्लीन और गुणवत्तापूर्ण आंका गया है।
- राष्ट्रीय स्तर पर वार्ड रैंकिंग: 10 हजार से 30 हजार आबादी वाले श्रेणी में आंध्र प्रदेश के गुंटूर और विजयवाड़ा के वार्ड पहले स्थान पर रहे। असम के तीन वार्ड दूसरे और बिहार तीसरे स्थान पर रहा।
गाजियाबाद के लिए लोनी बना 'प्रदूषण का रोड़ा' गाजियाबाद ने अपनी रैंकिंग में बड़ा सुधार दर्ज किया है, लेकिन नगर पालिका परिषद लोनी की हवा अब भी बेहद चिंताजनक बनी हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार, लोनी का बढ़ता प्रदूषण स्तर पूरे गाजियाबाद जिले की सेहत और रैंकिंग सुधार के प्रयासों में बड़ा रोड़ा बना हुआ है।





