छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में महानदी, पैरी, सोंढूर और खरून नदियों के तटवर्ती क्षेत्रों की उपजाऊ कछार भूमि में कृषि को टिकाऊ, कम जोखिम वाली और अधिक मुनाफेदार बनाने के लिए एक व्यापक फसल विविधीकरण योजना की शुरुआत की जा रही है। सितंबर-अक्टूबर से शुरू होने वाले इस अभियान के तहत 152 गांवों के 38 हजार से अधिक किसानों को सीधे जोड़ा जाएगा, जिससे कुल 30,841.96 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र लाभान्वित होगा। इस योजना का मुख्य ध्येय धान की पारम्परिक खेती को बंद करना नहीं, बल्कि किसानों की एकल फसल पर निर्भरता को कम करना है।
भू-भौतिकीय स्थिति के अनुसार 3 ज़ोन आधारित कृषि मॉडल
ज़मीन की प्रकृति, जलभराव और सिंचाई की उपलब्धता के अनुसार पूरे नदी तटवर्ती क्षेत्र को 3 ज़ोन में विभाजित किया गया है:
- ज़ोन 1 (निचले व बाढ़ प्रभावित क्षेत्र): धान के साथ जलभराव सहने में सक्षम खस, बच और लेमनग्रास जैसी उच्च मूल्य वाली औषधीय फसलें।
- ज़ोन 2 (मध्यम ऊंचाई व मौसमी जलभराव क्षेत्र): धान की कटाई के तुरंत बाद कम अवधि वाली दलहन, तिलहन और सब्जियां।
- ज़ोन 3 (उच्च ऊंचाई व बेहतर जल निकासी क्षेत्र): औषधीय फसलें, फलदार पौधे, सब्जियों की खेती तथा जैविक एवं प्राकृतिक खेती के क्लस्टर।
रबी सीजन: 5,458.90 हेक्टेयर में वैकल्पिक फसलों का प्रस्तावित आवंटन
रबी के मौसम में धान के विकल्पों के रूप में विविध फसलों का रकबा इस प्रकार तय किया गया है:
| फसल का प्रकारप्रस्तावित क्षेत्रफल (हेक्टेयर में) | |
| चना | 3,244.10 |
| गेहूं | 662.80 |
| सरसों | 472.50 |
| मक्का | 243.90 |
| उड़द | 214.80 |
| मूंग | 178.70 |
| मूंगफली | 142.20 |
| औषधीय फसलें | 110.60 |
| सूरजमुखी व अन्य | 39.00 |
माइक्रो-वाटरशेड मॉडल, भू-संरक्षण और व्यावहारिक प्रदर्शन
खेती के इस नए स्वरूप को सफल बनाने के लिए बुनियादी ढाँचे और पर्यावरण संरक्षण पर भी ध्यान दिया जा रहा है:
- जल व मिट्टी संरक्षण: धमतरी और मगरलोड क्षेत्र में 36 नालों की सफाई, 19 खेत तालाब, 17 सोख्ता गड्ढे और 7 चेक डैम/MIT सुधार प्रस्तावित हैं।
- नदी तटों का संरक्षण: 75 तटीय गांवों में नदी किनारे की मिट्टी को बहने से रोकने के लिए विशेष तटीय घास और पौधे लगाए जाएंगे।
- ऑन-फील्ड डिमॉन्स्ट्रेशन: धमतरी, कुरूद, मगरलोड और नगरी के चिन्हित खेतों में प्रत्यक्ष प्रदर्शन (प्रैक्टिकल मॉडल) आयोजित कर किसानों को प्रशिक्षित किया जाएगा।





