विदेशी चंदे के गलत इस्तेमाल के लिए बैन NGO को कांग्रेस और वाम का साथ क्यूँ?
मोदी सरकार के विरोधी बुद्धिजीवियों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला.
04 Jun 2016
|
1155
इंदिरा जयसिंह ने जुलाई, 2009 से मई, 2014 तक बतौर एएसजी काम करते हुए 96.60 लाख रुपए प्राप्त किए थे. एसोसिएशन ने 30 मार्च, 2016 के अपने जवाब में यह बात स्वीकार की है. उन्हें (इंदिरा जयसिंह को) एनजीओ ने केंद्र सरकार की इजाजत से 59 महीनों (जुलाई, 2009 से मई, 2014) के लिए 81.41 लाख रुपये दिए थे.
गृह मंत्रालय ने कहा कि यह बड़े आश्चर्य की बात है कि कैसे अतिरिक्त सॉलीसीटर जनरल जैसी एक वरिष्ठ विधि अधिकारी एक साथ ही और यह भी कि लंबी अवधि तक एक निजी निकाय के रॉल पर रह सकती हैं और कैसे उन्हें भारत सरकार के विधि अधिकारियों पर लागू नियमों के विपरीत अज्ञात उद्देश्यों के लिए (विदेशी चंदे) भुगतान किया जा सकता है. इसके अलावा कैसे एसोसिएशन (इस आशय के बिना किसी प्रस्ताव के) ऐसी व्यवस्था पर राजी हो गया और वह क्यों (उपयुक्त अनापति हासिल किए बगैर, जिसे हासिल करना एफसीआर, 2010 के तहत जरूरी है) ऐसी व्यवस्था पर राजी हो गईं.
नोटिस में कहा गया है कि यह न केवल एफसीआरए के प्रावधानों का उल्लंघन है, बल्कि प्रासंगिक सवाल खड़े करता है. एनजीओ के खाते की जांच पर गृह मंत्रालय ने कहा कि यह पाया गया कि विदेशी अनुदान में से 13.03 लाख रुपये धरनों, मसौदा विधोयक से जुड़ी बैठकों के लिए सांसदों या मीडिया को लाने-लेजान या रुकने की व्यवस्था करने पर खर्च किया गया, हालांकि विदेशी अनुदान के तहत जो रिटर्न फाइल किया गया उसमें इसका कोई उल्लेख नहीं था.
कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने गुरूवार को कहा कि इंदिरा जयसिंह के एनजीओ के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई लोगों के हितों का समर्थन करने वालों के प्रति सरकार के असहिष्णु रवैये को दर्शाती है. दिग्विजय ने आगे देश के अधिवक्ताओं को उकसाया कि “अधिवक्ताओं क्या आप थोडी हिम्मत दिखाओगे और उनके लिए आवाज उठाओगे,अगली बारी आपकी हो सकती है.”उधर इसी मुद्दे पर हमेशा की तरह मोदी जी और बीजेपी सरकार के खिलाफ बोलने वाले हर्ष मंदर, अरुणा रॉय समेत 50 से ज्यादा कथित सामजिक कार्यकर्ताओं ने एक ज्ञापन जारी कर केंद्र सरकार की आलोचना की.
अब सवाल यह है कि दिग्विजय सिंह और नक्सल हिंसा को समर्थन करने वाले ये समाजसेवी किस बात से नाराज हैं? लायर्स कलेक्टिव को बैन करने से या आने वाले दिनों में धरना-प्रदर्शन के नाम पर देश के खिलाफ होने वाली साजिशों में चंदे की रकम रुकने से उन्हें होने वाली नुकसान के कारण? दिल्ली के पौश इलाकों में अरबों के बंगले में रहकर, महंगी गाडिओं में 5 स्टार होटलों में मीटिंग करने वाले ये NGO पुरुष और महिलाएं जब से बीजेपी सरकार आई है अपने धंधे के मंदे होने से कभी असहिस्नुता , कभी सेकुलरिज्म खतरे में है, कभी पाठ्यक्रमों में इतिहास खतरे में है का नारा लगा कर चंद सेक्युलर मीडिया के ख़बरों में बने रहना चाहते हैं ताकि देश की जनता इन्हें भुला न दे. (विचार- सुधीर के सिंह.)
(लेख की राय लेखक का विचार है. पूर्वांचल सूर्य इसका समर्थन या विरोध नहीं करता)
अन्य खबरें
संपादकीय- डिजिटल नियंत्रण ढांचाः चुप्पी की ओर बढ़ता लोकतंत्र
15 Apr 2026 34
शब्दचित्रः नियति का शंखनाद
15 Apr 2026 45
इस्लामाबाद में कूटनीति की अंत्येष्टिः सुलगता सन्नाटा
15 Apr 2026 36
रसोई का संकट
15 Apr 2026 67
आवरणकथा- सत्ता संग्राम
15 Apr 2026 46
लाल अंतः बंदूकों के बाद का सवाल
15 Apr 2026 40
रॉकेट फोर्स: युद्ध का नया व्याकरण
15 Apr 2026 43
डिजिटल विद्रूपता का नया युग
15 Apr 2026 37
थोरियम का शंखनाद
15 Apr 2026 46
बिहार में नया ‘सम्राट’
15 Apr 2026 37
आकाश की विवशता
15 Apr 2026 48
अंबर के आलिंगन का महाअभ्यास
15 Apr 2026 36
अदृश्य आकाश, रक्तरंजित अरण्य
15 Apr 2026 42
असफल शांति, बढ़ता युद्ध
12 Apr 2026 61
साइना नेहवालः जिद, युग, विरासत
16 Feb 2026 291