गुमला।झारखंड के गुमला शहर से सटे करौंदी बगीचे में लगने वाले रथयात्रा मेला का इतिहास 108 साल पुराना है।जमींदार परिवार ने इस रथयात्रा मेले की शुरुआत की थी। जमींदारों ने जिस परंपरा और प्रथा की शुरुआत की थी आज भी वो रथयात्रा मेले में देखने को मिलती है। 1914 में करौंदी में मंदिर की स्थापना हुई।जहां भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा को स्थापित किया गया।उसी समय करौंदी बगीचे में 1000 आम के पौधे भी लगाए गए थे।समय बदलता गया आम के पौधे आज विशाल रूप धारण कर लिए है। रथयात्रा मेले भी बृहत रूप ले लिया।एक जुलाई को करौंदी बगीचा में लगने वाले रथयात्रा मेला की तैयारी पूरी कर ली गयी है।





ओड़िशा के पुरी से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की आयी थी मूर्ति





आपको दें कि जमींदार बड़ाइक देवनंदन सिंह ने करौंदी बगीचे में रथयात्रा मेले की शुरूआत किया था।देवनंदन सिंह ने पुरी से भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की विग्रह की गयी मूर्ति को गुमला लाए थे।गुमला में भगवान जगन्नाथ का भव्य स्वागत हुआ था। शुरू में देवनंदन के आवासीय परिसर में एक खपड़े के घर में मूर्तियों को स्थापित किया गया था।जहां पर मेला लगता था।छत्तीसगढ़ के जशपुर और ओड़िशा से भक्त आते थे। सुरखी चूना और पतला ईंट से मंदिर का निर्माण किया गया और वहां भगवान को स्थापित किया गया।जहां अब रथयात्रा मेला लगता है और मंदिर में पूजा होती है।





करौंदी में रथयात्रा एक जुलाई को, सुबह पांच बजे से शुरू होगी पूजा अर्चना





गुमला में तीन साल बाद इस वर्ष रथयात्रा मेला लगेगा और इसकी तैयारी पूरी हो गयी है।कोरोना काल के कारण पिछले दो साल से रथयात्रा मेले का आयोजन नहीं हुआ था। इस साल एक जुलाई को गुमला के करौंदी में रथयात्रा है।रथयात्रा को लेकर जगन्नाथ महाप्रभु सेवा समिति, करौंदी रथमेला की तैयारी और मेला को सफल बनाने के लिए कमेटी का गठन किया गया है।रथयात्रा सह मेला को सफल बनाने के लिए जगन्नाथ महाप्रभु सेवा समिति, करौंदी की बैठक हुई थी।





मुख्य संरक्षक सह सेवइत बड़ाइक कृष्णदेव सिंह ने बताया कि एक जुलाई की सुबह पांच बजे से पूजा अर्चना शुरू होगी।संध्या पांच बजे भगवान जगन्नाथ महाप्रभु रथ में सवार होकर मौसीबाड़ी के लिए रवाना होंगे।उन्होंने सभी पदाधिकारियों और सदस्यों से समय पर मंदिर परिसर पहुंचकर पूजा पाठ और श्रद्धालुओं की सुविधा की अपील की है।