आदिवासियों को एकसूत्र में बांधने का होगा प्रयास, गुजरात, महाराष्ट्र और आंध्रप्रदेश के भी जुटेंगे आदिवासी





प्रतिनिधि,जमशेदपुर।पूर्व सांसद सह आदिवासी सेंगेल अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष सालखन मुर्मू ने कदमा स्थित आवास पर सोमवार आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पूरे देश के आदिवासियों को एकसूत्र में बांधने के लिए आगामी 17 जनवरी दिल्ली कांस्टीट्यूशन क्लब में एक राष्ट्रीय सम्मेलन करने का निर्णय लिया गया है। वहीं सम्मेलन में झारखंड, बंगाल, बिहार, ओड़िशा, असम, छत्तिसगढ़ के अलावा गुजरात, महाराष्ट्र और आंध्रप्रदेश के आदिवासी भी शामिल होंगे। कार्यक्रम को ऐतिहासिक बनाने के लिए अभी से तैयारियां शुरू कर दी गई है। जिसके लिए अलग-अलग जिम्मेवारियां भी लोगों को दी गई है।





उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 तक हर हाल में सरना धर्म कोड हासिल करना है और झारखंड अलग राज्य बनने के बाद से ही आंदोलन किया जा रहा है। साथ ही इस बात को देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक भी पहुंचाया गया है। इसके लिए देशभर के आदिवासियों को एकजूट करने का प्रयास किया जा रहा है। अगर सरना धर्म कोड नहीं दिया जाता है तो आदिवासी ईसाई और मुसलमान बनते रहेंगे। जबकि कोड मिलने के बाद सभी को वापस लाया जा सकता है।उन्होंने कहा कि आदिवासी सेंगेल अभियान की ओर से 1 जनवरी को राष्ट्रीय आदिवासी विद्रोह का शंखनाद किया जाएगा। जिसके तहत संथाल परगना की राजधानी दुमका में कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। आदिवासियों की रक्षा में विफल सोरेन खानदान और ईसाई मिशनरियों के खिलाफ आवाज बुलंद कर विद्रोह किया जाएगा।आदिवासी समाज के अधिकांश युवा छात्र तथाकथित बुद्धिजीवी, नौकरी पेशा में शामिल आदिवासी, सामाजिक संगठनों के अगुआ और आदिवासी स्वशासन व्यवस्था के अगुआ के साथ समन्वय बनाकर उनको हासा, भाषा, जाति, धर्म, इज्जत, आबादी, रोजगार, चास-बास और संवैद्धानिक अधिकारों के प्रति सजग व जिम्मेवार बनाने की कोशिश होगी। परंपरा के नाम पर जारी नशापान, अंधविश्वास, डायन प्रथा, ईर्ष्या-द्वेश, डनडोम, बारोन, हांडी-पॉवरा चोडोर, आदिवासी महिला विरोधी मानसिकता, वोट की खरीद-बिक्री आदि पर समाज सुधार भी जरूरी है। जबकि आदिवासी सेंगेल अभियान की ओर से मूलरूप से पांच मांगों को लेकर आवाज बुलंद करने का काम किया जा रहा है। जिसमें सरना धर्म रोड की मान्यता देने, संताली भाषा को झारखंड की प्रथम राजभाषा बनाने, झारखंड प्रदेश को अबुआ दिशुम अबुआ राज पुर्नस्थापित करने, असम अंडमान के झारखंडी आदिवासियों को एसटी बनाने और आदिवासी स्वशासन व्यवस्था अर्थात ट्राइबल सेल्फ रूल सिस्टम में संविधान और जनतंत्र को समाहित करने शामिल है। मौके पर आदिवासी सेंगेल अभियान की महिला नेत्री सुमित्रा मुर्मू, बीमो मुर्मू, जूनियर सालखन मुर्मू, मार्सल टुडू, युवा नेत्री ज्योति मुर्मू और घनश्याम टुडू भी मौजूद थे।