मुंबई। बॉलीवुड के दिग्गज और हरफनमौला अभिनेता अनुपम खेर और किरण खेर की जोड़ी फिल्म इंडस्ट्री की सबसे सदाबहार और सम्मानित जोड़ियों में से एक गिनी जाती है। साल 1985 में शादी के बंधन में बंधे इस कपल के सफर को 41 साल हो चुके हैं, लेकिन इनकी लव स्टोरी आज भी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम दिलचस्प नहीं लगती। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान अनुपम खेर ने अपनी शादीशुदा जिंदगी से पहले का एक ऐसा मजेदार और हैरान करने वाला किस्सा साझा किया, जिसे सुनकर हर कोई दंग रह गया।
अनुपम खेर ने खुलासा किया कि एक दौर ऐसा भी था, जब उनकी तत्कालीन गर्लफ्रेंड के प्रेम पत्र (Love Letters) किरण खेर के पते पर आया करते थे और आर्थिक तंगी के चलते वह किरण से घर वापस जाने के लिए टैक्सी का किराया तक उधार लिया करते थे।
चंडीगढ़ का वो थिएटर और कॉलेज की 'स्टार' किरण
अपनी पुरानी यादों के झरोखे को खोलते हुए अनुपम खेर ने बताया कि किरण से उनकी पहली मुलाकात चंडीगढ़ के थिएटर डिपार्टमेंट में हुई थी। उस समय किरण उनसे एक साल सीनियर थीं।
अनुपम खेर ने कहा: "कॉलेज के दिनों में किरण बेहद पॉपुलर थीं। वह बेहतरीन बैडमिंटन खेलती थीं, इंग्लिश नाटकों का हिस्सा बनती थीं और यूनिवर्सिटी में हर कोई उन्हें जानता था। मुझे हमेशा लगता था कि किरण मेरी पहुंच से बहुत दूर हैं। मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि आगे चलकर हम दोनों एक-दूसरे के प्यार में इस कदर गिरफ्तार हो जाएंगे।"
मुंबई का संघर्ष: जब रास्ते अलग थे और दिल परेशान
वक्त का पहिया घूमा और दोनों अपने सपनों को पूरा करने के लिए मायानगरी मुंबई आ गए। हालांकि, उस समय दोनों की जिंदगी बिल्कुल अलग-अलग रास्तों पर चल रही थी। किरण खेर की शादी बिजनेसमैन गौतम बेरी से हो चुकी थी और उनका एक बेटा (सिकंदर) भी था। वहीं, अनुपम खेर उस समय किसी और के साथ रिलेशनशिप में थे।
अनुपम ने बताया कि संघर्ष और आर्थिक तंगी के उस दौर में वह अक्सर किरण के घर जाया करते थे। हालात ऐसे थे कि कई बार किरण के घर से अपने कमरे पर लौटने के लिए उनके पास पैसे नहीं होते थे, जिसके लिए वह किरण की मदद लेते थे।
'कुछ भी हो सकता है': जब दोस्त बने हमसफर
इस कहानी का सबसे अनोखा मोड़ साझा करते हुए अनुपम ने मुस्कुराते हुए कहा, "मेरे सारे लेटर्स, यहां तक कि मेरी गर्लफ्रेंड की चिट्ठियां भी किरण के घर के पते पर ही आया करती थीं। इसीलिए मैं हमेशा कहता हूं— 'कुछ भी हो सकता है!' मुझे रत्ती भर भी अंदाजा नहीं था कि जिस घर में मेरी गर्लफ्रेंड के खत आ रहे हैं, वही महिला एक दिन मेरी जीवनसंगिनी बनेगी।"
धीरे-धीरे दोनों की दोस्ती और गहरी होती गई। उस दौरान दोनों ही अपनी निजी जिंदगी में एक बेहद मुश्किल और कठिन दौर से गुजर रहे थे। अनुपम अपने रिश्ते में परेशान थे, तो दूसरी तरफ किरण की शादीशुदा जिंदगी भी बेहद नाजुक मोड़ पर थी। दुख और संघर्ष के इस दौर में दोनों एक-दूसरे के सबसे बड़े संबल बने।
1985 में रचाई शादी, आज भी हैं मिसाल
गहरी दोस्ती कब अटूट प्यार में बदल गई, दोनों को पता ही नहीं चला। आखिरकार साल 1985 में दोनों ने एक-दूसरे का हाथ थाम लिया और शादी के बंधन में बंध गए। अनुपम और किरण ने मिलकर बेटे सिकंदर खेर की बेहतरीन परवरिश की। आज चार दशकों से भी लंबे इस खूबसूरत सफर को पूरा करने के बाद भी यह जोड़ी आपसी समझ, सम्मान और बेइंतहा मोहब्बत के साथ नए कपल्स के लिए एक बेहतरीन मिसाल बनी हुई है।





