देशभर में जहां स्वाइन फ्लू का प्रकोप जारी है, वहीं झारखंड की राजधानी रांची में 'लेप्टोस्पायरोसिस' (रैट फीवर) नाम की खतरनाक बीमारी चुपचाप पैर पसार रही है। पिछले दो महीनों (जुलाई और अगस्त) में केवल रांची के रानी चिल्ड्रन अस्पताल में ही इसके 130 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं। संक्रमण बच्चों के फेफड़ों और दिमाग तक पहुंचने के कारण कई मरीजों को गंभीर हालत में ICU में भर्ती कराना पड़ा है।
संक्रमण फैलने का कारण और जोखिम
- मुख्य वाहक: यह बीमारी 'लेप्टोस्पाइरा' बैक्टीरिया से फैलती है, जिसका मुख्य वाहक संक्रमित चूहा होता है।
- फैलने का तरीका: बारिश के दिनों में बिलों में पानी भरने से चूहे बाहर आ जाते हैं। उनके मूत्र से दूषित हुआ पानी, मिट्टी या जूठे फल इस बैक्टीरिया को फैलाते हैं।
- संक्रमण का मार्ग: दूषित पानी में नंगे पैर चलने या त्वचा पर लगे कट/घाव के माध्यम से यह बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश करता है। यह बैक्टीरिया नमी वाली जगहों पर महीनों जीवित रह सकता है।
- बच्चों पर अधिक खतरा: 5 से 10 साल के बच्चे अक्सर जलजमाव वाले इलाकों में खेलते हैं और नंगे पैर रहते हैं, जिससे वे इस संक्रमण की चपेट में आसानी से आ रहे हैं।
प्रमुख लक्षण
- तेज बुखार, ठंड लगना और गंभीर सिरदर्द।
- मांसपेशियों में तेज दर्द, कमजोरी और उल्टी।
- आंखों में लालिमा और बच्चों में सांस लेने में तकलीफ।
- गंभीर स्थिति: समय पर इलाज न मिलने पर यह बीमारी पीलिया (Jaundice), लिवर और किडनी फेल्योर का कारण बन सकती है।
बचाव के मुख्य उपाय
- जलजमाव से दूरी: बच्चों को जमा हुए पानी या कीचड़ में खेलने न दें और उन्हें नंगे पैर बाहर न जाने दें।
- खान-पान में सावधानी: पीने के लिए केवल साफ या उबले पानी का इस्तेमाल करें और फलों को खाने से पहले अच्छी तरह धोएं।
- घाव की सुरक्षा: यदि शरीर पर कोई घाव या कट हो, तो उसे हमेशा ढका रखें और दूषित पानी के संपर्क से बचाएं।
- समय पर डॉक्टरी सलाह: लगातार बुखार और बदन दर्द जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या डॉक्टर से संपर्क करें।





