उत्तराखंड के हल्द्वानी कोतवाली थाने में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और वरिष्ठ कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ एक गंभीर कानूनी शिकंजा कस गया है। अनुसूचित जाति के स्थानीय निवासी अमित कुमार की तहरीर पर पुलिस ने राहुल गांधी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और SC-ST एक्ट की संगीन गैर-जमानती धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की है।

यह पूरा विवाद हल्द्वानी में आयोजित कांग्रेस की एक रैली के बाद हुए ‘शुद्धिकरण यज्ञ’ और उस पर राहुल गांधी द्वारा दी गई टिप्पणी से उपजा है। राहुल गांधी ने इस शुद्धिकरण यज्ञ की आलोचना करते हुए इसे दलित विरोधी करार दिया था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस वक्तव्य से अनुसूचित वर्ग की सामाजिक और धार्मिक भावनाओं को गहरा आघात पहुंचा है।

मामले में शामिल प्रमुख धाराएं और उनके कानूनी प्रावधान:

  • BNS धारा 196 (गैर-जमानती): विभिन्न समुदायों के बीच नफरत, दुश्मनी या वैमनस्य फैलाने के प्रयासों पर यह धारा लगाई जाती है। आमतौर पर सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने के मामलों में इस्तेमाल होने वाली इस धारा में दोष सिद्ध होने पर न्यूनतम 3 वर्ष की कैद का प्रावधान है।
  • BNS धारा 299 (गैर-जमानती): किसी भाषण, वीडियो या लेख के जरिए धार्मिक या सामुदायिक हिंसा भड़काने के प्रयास पर यह कार्रवाई होती है। इसमें अधिकतम 3 साल की सजा तय है। (उल्लेखनीय है कि इमरान प्रतापगढ़ी बनाम गुजरात सरकार (2025) मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि केवल किसी एक व्यक्ति की भावनाएं आहत होने पर, बिना किसी जमीनी प्रभाव के यह धारा लागू नहीं की जानी चाहिए।)
  • SC-ST एक्ट धारा 3(1)(Q) (गैर-जमानती): यह धारा तब लागू होती है जब कोई व्यक्ति किसी दलित या आदिवासी को प्रताड़ित करने के इरादे से अधिकारियों को झूठी जानकारी देता है। इसमें 6 माह से लेकर 5 वर्ष तक की सजा हो सकती है।

राहुल गांधी पर दर्ज इस प्राथमिकी के बाद उत्तराखंड का राजनीतिक पारा चढ़ गया है। कानूनी विशेषज्ञों की नजरें अब पुलिस की आगामी जांच और कानूनी प्रक्रिया पर टिकी हैं।