पुणे के बाद कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम अब 12 सितंबर को मध्य प्रदेश की व्यापारिक और शैक्षणिक राजधानी इंदौर में आयोजित किया जाएगा। पूर्व में यह कार्यक्रम नागपुर में प्रस्तावित था, जिसे फिलहाल आगे बढ़ा दिया गया है। महारानी अहिल्याबाई होलकर की इस ऐतिहासिक नगरी से राहुल गांधी महिला वर्ग को साधने के साथ-साथ भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के खिलाफ वैचारिक मोर्चा खोलेंगे।
अहिल्याबाई होलकर: महिला सशक्तिकरण की मिसाल
18वीं शताब्दी में महारानी अहिल्याबाई होलकर द्वारा महिलाओं के अधिकारों और सामाजिक सुधारों के लिए उठाए गए क्रांतिकारी कदम आज भी अनुकरणीय हैं:
- संपत्ति का अधिकार: विधवा महिलाओं की संपत्ति राज्य द्वारा जब्त करने की प्रथा पर रोक लगाई।
- सामाजिक सुधार: सती प्रथा का कड़ा विरोध और विधवा पुनर्विवाह का समर्थन किया।
- आर्थिक आत्मनिर्भरता: प्रसिद्ध महेश्वरी साड़ियों के हथकरघा उद्योग की शुरुआत कर महिलाओं को रोजगार से जोड़ा।
- सैन्य सुरक्षा व शिक्षा: महिलाओं के लिए विशेष सैन्य टुकड़ी का गठन किया और महिला शिक्षा को बढ़ावा दिया।
इंदौर चुनने के पीछे की सियासी रणनीति
- शिक्षा का प्रमुख केंद्र: इंदौर को 'मिनी बॉम्बे' कहा जाता है और यह मध्य भारत में युवाओं तथा छात्रों का सबसे बड़ा हब है।
- संविधान बनाम मनुस्मृति का नैरेटिव: राहुल गांधी अपनी सभाओं में कांग्रेस और भाजपा-आरएसएस के बीच की लड़ाई को 'संविधान बनाम मनुस्मृति' की वैचारिक जंग करार दे चुके हैं।
- महिला विरोधी सोच का आरोप: पुणे में राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि भाजपा-आरएसएस की विचारधारा मनुस्मृति से प्रभावित है जो महिला विरोधी है। अब इंदौर में अहिल्याबाई के लोककल्याणकारी शासन का उदाहरण देकर वे इस हमले को और तेज करेंगे।
कांग्रेस बनाम बीजेपी-आरएसएस का सियासी घमासान
राहुल गांधी के बयानों के बाद दोनों पक्षों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है:
- कांग्रेस का पलटवार: कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि संविधान निर्माण के समय संघ के लोगों ने इसका विरोध करते हुए इसे मनुस्मृति पर आधारित करने की मांग की थी।
- युवक कांग्रेस का प्रदर्शन: राहुल के निर्देश पर यूथ कांग्रेस ने दिल्ली स्थित संघ मुख्यालय के बाहर मनुस्मृति की प्रतियां जलाकर विरोध दर्ज कराया था।
12 सितंबर को इंदौर में होने वाले इस सम्मेलन के जरिए कांग्रेस महारानी अहिल्याबाई के आदर्शों को सामने रखकर देश के युवा और महिला मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की पुरजोर कोशिश करेगी।





