मुंबई: भारतीय सिनेमा को 'एक दो तीन' और 'डोला रे डोला' जैसे कालजयी गीतों पर थिरकाने वाली सरोज खान (Saroj Khan) की पहचान भले ही 'मदर ऑफ कोरियोग्राफी' के रूप में हो, लेकिन उनकी निजी जिंदगी किसी त्रासदी से कम नहीं थी। मात्र 13 साल की उम्र में अपनी उम्र से 30 साल बड़े शख्स से शादी और फिर कदम-कदम पर मिले धोखे ने उन्हें वक्त से पहले बड़ा कर दिया था।
डॉक्टर बनने का सपना और 3 साल की उम्र में काम का बोझ
सरोज खान की जिंदगी में फिल्मों का आना कोई शौक नहीं, बल्कि मजबूरी थी। विभाजन के बाद उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई थी।
बचपन का संघर्ष: पिता के देहांत के बाद घर चलाने के लिए उन्होंने महज 3 साल की उम्र में बाल कलाकार के रूप में काम करना शुरू किया।
मजबूरी में डांस: सरोज खान डॉक्टर बनना चाहती थीं, लेकिन किस्मत उन्हें ग्रुप डांसर के रूप में फिल्मों के सेट पर ले आई। 12 साल की उम्र में उनकी प्रतिभा देख डांस डायरेक्टर सोहनलाल ने उन्हें अपनी असिस्टेंट बना लिया।
धोखे की बुनियाद पर टिकी पहली शादी
सरोज खान के जीवन का सबसे विवादास्पद और दर्दनाक मोड़ तब आया, जब उन्होंने 13 साल की उम्र में अपने गुरु सोहनलाल से शादी की।
अनजान बचपन: उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्हें शादी का मतलब तक नहीं पता था। सोहनलाल ने बस उनके गले में एक काला धागा बांध दिया था और उन्हें लगा कि उनकी शादी हो गई है।
छिपी सच्चाई: शादी के बाद उन्हें पता चला कि सोहनलाल पहले से शादीशुदा थे और उनके चार बच्चे थे। यह शादी कानूनी रूप से अमान्य थी।
कम उम्र में मातृत्व: महज 14 साल की उम्र में वह पहली बार मां बनीं। उन्होंने अपनी एक बच्ची को जन्म के आठ महीने के भीतर ही खो दिया था, जिसने उन्हें गहरे सदमे में डाल दिया था।
सरदार रोशन खान से मुलाकात और धर्म परिवर्तन
जिंदगी के उतार-चढ़ाव के बीच 1975 में उनकी मुलाकात बिजनेसमैन सरदार रोशन खान से हुई। यह रिश्ता उनकी जिंदगी में स्थिरता लेकर आया।
प्रेम की शर्त: रोशन खान ने उन्हें शादी का प्रस्ताव दिया, लेकिन सरोज खान की शर्त थी कि वह उनके पहली शादी से हुए बच्चों को भी अपनाएंगे।
इस्लाम अपनाना: रोशन खान के प्यार और संवेदनशीलता को देखते हुए पंजाबी हिंदू परिवार से ताल्लुक रखने वाली सरोज खान ने उनके लिए इस्लाम धर्म अपना लिया।
विरासत जो कभी नहीं मिटेगी
तमाम व्यक्तिगत दुखों और दिल टूटने के बावजूद, सरोज खान ने कभी अपनी कला को प्रभावित नहीं होने दिया। उन्होंने श्रीदेवी और माधुरी दीक्षित जैसे सितारों को सुपरस्टार बनाने में अहम भूमिका निभाई।
"दर्द ने कभी उनका साथ नहीं छोड़ा, लेकिन उन्होंने उस दर्द को अपने डांस के 'नजाकत' और 'अदाओं' में बदल दिया।"
निधन: COVID-19 महामारी की पहली लहर के दौरान भारतीय सिनेमा का यह चमकता सितारा हमेशा के लिए शांत हो गया। उनके परिवार में उनके पति सरदार रोशन खान, बेटे हामिद खान और बेटी सुकैना खान हैं। सरोज खान आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी सिखाई गई 'अदाएं' आज भी हर डांसर की प्रेरणा बनी हुई हैं।





