नई दिल्ली: दिवंगत बिजनेसमैन संजय कपूर की संपत्ति और पारिवारिक ट्रस्ट को लेकर चल रहा विवाद अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। गुरुवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) डी.वाई. चंद्रचूड़ को इस हाई-प्रोफाइल मामले में मध्यस्थ (Mediator) नियुक्त किया है।
कोर्ट की नसीहत: "इसे परिवार तक ही सीमित रखें"
न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने सुनवाई के दौरान कड़ा रुख अपनाते हुए दोनों पक्षों—संजय कपूर की मां रानी कपूर और उनकी पत्नी प्रिया कपूर—को निजी गरिमा बनाए रखने की सलाह दी। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा:
"यह एक पारिवारिक विवाद है, इसे मनोरंजन का जरिया नहीं बनाया जाना चाहिए। दोनों पक्ष सार्वजनिक रूप से बयानबाजी करने और सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को उठाने से बचें।"
क्या है पूरा विवाद?
संजय कपूर के निधन के बाद से ही उनकी विशाल संपत्ति और पारिवारिक ट्रस्ट के मालिकाना हक को लेकर सास-बहू के बीच कानूनी लड़ाई जारी है।
रानी कपूर की याचिका: 80 वर्षीय रानी कपूर ने पारिवारिक ट्रस्ट को 'अमान्य' घोषित करने की मांग करते हुए याचिका दायर की थी।
नोटिस और सहमति: कोर्ट ने इस मामले में प्रिया कपूर को नोटिस जारी किया था, जिसके बाद दोनों पक्षों के वकीलों ने कोर्ट के सुझाव पर आपसी सहमति से मध्यस्थता (Mediation) के जरिए रास्ता निकालने पर हामी भरी।
अगस्त में होगी अगली सुनवाई
अब पूर्व सीजेआई डी.वाई. चंद्रचूड़ दोनों पक्षों के बीच सुलह की कोशिश करेंगे। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि मध्यस्थ की प्रारंभिक रिपोर्ट मिलने के बाद ही इस मामले की आगे की कार्यवाही होगी। मामले की अगली सुनवाई अगस्त के महीने में तय की गई है।
यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कानूनी पेचीदगियों में उलझा यह पारिवारिक विवाद मध्यस्थता के जरिए किसी सौहार्दपूर्ण समाधान तक पहुंच पाता है या नहीं।





