नई दिल्ली: दिवंगत बिजनेसमैन संजय कपूर की 30,000 करोड़ रुपये की विशाल संपत्ति को लेकर चल रही कानूनी जंग में एक नया मोड़ आया है। दिल्ली हाई कोर्ट ने बॉलीवुड अभिनेत्री करिश्मा कपूर के बच्चों, समायरा और कियान राज कपूर के पक्ष में अंतरिम राहत देते हुए उनकी सौतेली माँ प्रिया कपूर को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि संपत्ति की सुरक्षा सर्वोपरि है और इसे किसी भी तरह से कम नहीं किया जाना चाहिए।
संपत्ति को सुरक्षित रखने के निर्देश
जस्टिस ज्योति सिंह की पीठ ने इस हाई-प्रोफाइल मामले की सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण आदेश पारित किए। कोर्ट ने संजय कपूर की तीसरी पत्नी प्रिया कपूर को स्वर्गीय बिजनेसमैन की भारतीय कंपनियों में मौजूद इक्विटी या शेयरहोल्डिंग को बेचने, गिरवी रखने या किसी अन्य को ट्रांसफर करने से तत्काल प्रभाव से रोक दिया है।
अदालत ने अपने आदेश में कहा:
"संपत्ति को सुरक्षित रखा जाना चाहिए और उसे खत्म नहीं किया जाना चाहिए। चूंकि ट्रायल में समय लग सकता है, इसलिए याचिकाकर्ताओं (करिश्मा के बच्चों) द्वारा उठाई गई चिंताओं का समाधान होना आवश्यक है।"
सुप्रीम कोर्ट ने दी थी सेटलमेंट की सलाह
इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए मध्यस्थता (Mediation) पर जोर दिया था। शीर्ष अदालत ने संजय कपूर की 80 वर्षीय माँ, रानी कपूर की उम्र का हवाला देते हुए परिवार को आपसी सहमति से मामला सुलझाने की सलाह दी थी ताकि यह कानूनी लड़ाई दशकों तक न खिंचे। इस मामले में अगली सुनवाई अगले सप्ताह होनी तय है।
तीन शादियाँ और करोड़ों का साम्राज्य
संजय कपूर का निजी जीवन और उनका बिजनेस साम्राज्य हमेशा चर्चा में रहा। उन्होंने कुल तीन शादियां की थीं:
नंदिता महतानी (1996-2000): पहली शादी जो चार साल चली।
करिश्मा कपूर (2003-2016): दूसरी शादी, जिससे उनके दो बच्चे समायरा और कियान हैं। 13 साल बाद इनका तलाक हो गया था।
प्रिया सचदेव (2017-2025): तीसरी पत्नी, जो संजय के निधन तक उनके साथ थीं।
लंदन में हुआ था दुखद निधन
उल्लेखनीय है कि नामी उद्योगपति संजय कपूर का निधन 15 जून 2025 को लंदन में हुआ था। वह पोलो खेलने के शौकीन थे और मैच के दौरान ही उन्हें दिल का दौरा पड़ा, जो जानलेवा साबित हुआ। उनके निधन के बाद से ही उनकी 30 हजार करोड़ की विरासत को लेकर कानूनी उत्तराधिकार की लड़ाई शुरू हो गई थी।
इस फैसले के बाद अब सबकी नजरें अगले हफ्ते होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहाँ यह तय होगा कि मध्यस्थता के जरिए इस विवाद का अंत होता है या कानूनी प्रक्रिया और लंबी खिंचेगी।





