मुंबई: बड़े पर्दे पर अपनी कॉमेडी से दर्शकों को लोटपोट करने वाले 'चूचा' यानी वरुण शर्मा की असल जिंदगी का एक किस्सा इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान वरुण ने अपने कॉलेज के दिनों का एक ऐसा अनुभव साझा किया, जो जितना मजाकिया सुनने में लगता है, असल में उतना ही खतरनाक और दर्दनाक था। वरुण ने बताया कि सीनियर छात्रों की रैगिंग से बचने के लिए वे जानबूझकर खुद को बीमार कर लेते थे।

जब रैगिंग से बचने के लिए 'वरदान' बनी बीमारी

बॉलीवुड में 'फुकरे' और 'छिछोरे' जैसी फिल्मों से अपनी पहचान बनाने वाले वरुण शर्मा ने बताया कि कॉलेज के दिनों में वे रैगिंग से इस कदर डरे हुए थे कि उन्होंने इससे बचने के लिए एक जोखिम भरा रास्ता निकाला। वे जानबूझकर इन्फेक्शन का शिकार हो जाते थे ताकि उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़े और वे सीनियर्स की नजरों से दूर रह सकें।

₹200 में 'कंजक्टिवाइटिस' का सौदा

वरुण ने इस अजीबोगरीब तरीके का खुलासा करते हुए बताया कि वे अपने कॉलेज के उन छात्रों को ढूंढते थे जिन्हें कंजक्टिवाइटिस (आंख आना) हुआ हो।

अनोखा सौदा: वरुण उस छात्र को 200 रुपये देते थे और बदले में जानबूझकर उसकी आंखों से इन्फेक्शन अपने अंदर ट्रांसफर कर लेते थे।

खतरनाक तरीका: वे उस संक्रमित लड़के की आंखों को छूकर अपनी आंखों में लगा लेते थे, जिससे कुछ ही घंटों में उनकी आंखें सूज जाती थीं।

मकसद: एक बार इन्फेक्शन होने के बाद उन्हें 3-4 दिनों के लिए अस्पताल में भर्ती कर लिया जाता था या उन्हें आइसोलेशन में भेज दिया जाता था। वरुण के लिए ये 4 दिन रैगिंग के टॉर्चर से मिलने वाली एक बड़ी राहत थे।

फिल्मी किरदारों से मेल खाती असल जिंदगी

दिलचस्प बात यह है कि वरुण ने 'छिछोरे' जैसी फिल्मों में हॉस्टल लाइफ और कॉलेज की मस्ती को जिया है, लेकिन उनकी अपनी कॉलेज लाइफ काफी तनावपूर्ण रही थी। हालांकि आज वे इसे एक पुराने किस्से की तरह सुनाते हैं, लेकिन उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अपनी सेहत के साथ इस तरह का खिलवाड़ करना बेहद जोखिम भरा था और वे किसी को भी ऐसा करने की सलाह नहीं देते।

वरुण का करियर ग्राफ: 2013 में 'फुकरे' से डेब्यू करने वाले वरुण आज इंडस्ट्री के सबसे पसंदीदा कॉमिक एक्टर्स में से एक हैं। 'सर्कस', 'रुही' और 'अर्जुन पटियाला' जैसी फिल्मों के जरिए उन्होंने साबित किया है कि कॉमिक टाइमिंग के मामले में उनका कोई जवाब नहीं है।