मुंबई: साल 1993 बॉलीवुड के लिए जितना यादों भरा है, उतना ही संजय दत्त के लिए दर्दनाक भी। उस दौर में निर्देशक सुभाष घई की फिल्म 'खलनायक' की शूटिंग जोरों पर थी। फिल्म का क्लाइमैक्स शूट हो चुका था, लेकिन तभी 1993 के मुंबई बम धमाकों के केस में अवैध हथियार रखने के आरोप में संजय दत्त को गिरफ्तार कर लिया गया।

जेल और 'खलनायक' का कनेक्शन

अधूरा शूट: जिस वक्त संजय दत्त को जेल ले जाया गया, फिल्म के पोस्ट-प्रोडक्शन का काम जारी था और एक महत्वपूर्ण कोर्ट सीन की शूटिंग अभी बाकी थी।

फ्लॉप होने का डर: फिल्म इंडस्ट्री में उस वक्त यह माना जा रहा था कि इस बड़े विवाद और अभिनेता की गिरफ्तारी के बाद फिल्म बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिरेगी। कई जगहों पर फिल्म और संजय दत्त के खिलाफ प्रदर्शन भी हुए।

सुभाष घई की रणनीति और शानदार वापसी

विवाद के बीच सुभाष घई ने हार मानने के बजाय इसे एक अवसर के रूप में देखा।

धमाकेदार प्रीमियर: जब संजय दत्त जमानत पर बाहर आए, तो सुभाष घई ने फिल्म के भव्य प्रीमियर आयोजित किए।

फैंस का दीवानापन: जब संजय दत्त अपनी को-स्टार माधुरी दीक्षित के साथ प्रीमियर पर पहुंचे, तो वहां मौजूद भीड़ ने उनका किसी नायक की तरह स्वागत किया। इस जनसैलाब को देखकर घई को यकीन हो गया कि फिल्म ब्लॉकबस्टर होगी।

'बल्लू बलराम' की इमेज: फिल्म में संजय दत्त का किरदार एक अपराधी (बल्लू) का था। उनकी निजी जिंदगी की 'नेगेटिव इमेज' पर्दे पर उनके किरदार के साथ इतनी सटीक बैठी कि दर्शक उन्हें देखने के लिए सिनेमाघरों की ओर दौड़ पड़े।

बॉक्स ऑफिस के आंकड़े (1993)

6 अगस्त 1993 को रिलीज हुई इस फिल्म ने कमाई के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए:

बजट: लगभग 3.75 करोड़ रुपये

भारत में नेट कलेक्शन: लगभग 12 करोड़ रुपये

वर्ल्डवाइड कलेक्शन: लगभग 24 करोड़ रुपये

संगीत का जादू

फिल्म की सफलता में लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के संगीत का भी बड़ा हाथ था। 'चोली के पीछे क्या है' और 'नायक नहीं खलनायक हूँ मैं' जैसे गानों ने उस दौर में तहलका मचा दिया था।

निष्कर्ष: 'खलनायक' केवल एक फिल्म नहीं थी, बल्कि वह एक ऐसा दौर था जहाँ रील लाइफ और रियल लाइफ की उलझनों ने मिलकर एक 'मेगा ब्लॉकबस्टर' को जन्म दिया। आज भी जब बॉलीवुड की सबसे बड़ी हिट्स की बात होती है, तो 'खलनायक' का जिक्र जरूर आता है।