उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के तिकुनिया हिंसात्मक बवाल के मुख्य आरोपी केंद्रीय गृह राज्य मंत्री के बेटे आशीष मिश्रा मोनू जिला जेल की बैरक नंबर 21 में हैं।आशीष को शनिवार की रात लगभग सवा बजे जेल में शिफ्ट किया गया।



जेल सूत्रों के अनुसार आशीष ने शनिवार रात उलझन और बेचैनी भरी गुजारी और रात भर सोये नही।रात लगभग सवा बजे जिला जेल में दाखिल होने के बाद आशीष के चेहरे पर बेचैनी और उलझन साफ-साफ दिखी।पिता केंद्रीय गृह राज्य मंत्री होने के बाद भी आशीष के पास जिला जेल में दाखिल होते समय सोने-चांदी का कोई भी कीमती सामान नही था।आशीष का मोबाइल तो एसआईटी ने पहले ही जब्त कर लिया था।आशीष की जेब भी कंगाल थी।आशीष जब जेल में दाखिल हुए और उसके बाद जेल के डॉ. सुनील अजय ने आशीष को मेडिकल चेकअप के लिए बुलाया। आशीष ने बताया कि पुलिस पहले ही उनका मेडिकल करा चुकी है,लेकिन जेल मैनुअल का हवाला देकर जेल प्रशासन ने दोबारा मेडिकल कराया, उसमें भी आशीष फिट निकले।



इस दौरान तिकुनिया हिंसात्मक बवाल के मामले में जिला जेल अस्पताल में बंदी बने लवकुश और आशीष पांडेय भी वही थे, लेकिन उनकी आशीष से मुलाकात नही हो पायी। कोरोना के प्रकोप के बाद जिला जेल में बनाई गई विशेष बैरक नंबर 21 में आशीष को करीब 1:30 बजे शिफ्ट कर दिया गया।



जेल सूत्रों के अनुसार सुबह नाश्ते में सभी बंदियों को रविवार का दिन होने से दलिया दिया गया था।आशीष को भी एक कटोरी दलिया आया। दोपहर को भोजन भी किया,लेकिन मुलाकात करने वाली सूची का नाम पुकारा गया तो आशीष के हाथ मायूसी ही लगी। आशीष उससे मिलने कोई सगा संबंधी, मित्र या समर्थक नहीं पहुंचा था।



नए बंदी के जेल में प्रवेश के बाद उसे मुलाहिजा बैरक में रखा जाता है, जहां पहले उसका सघन शारीरिक परीक्षण करने के बाद शरीर पर बने चोट, जख्म और चिह्नों को दर्ज करने के साथ ही शारीरिक विशिष्टयों का अंकन होता है। अंगुष्ठ चिह्न से लेकर चेहरे के तिल को भी दर्ज किया जाता है। इसके साथ ही उससे जुड़ी व्यक्तिगत जानकारियां भी दर्ज की जाती हैं कि उसके दोस्त कौन हैं, क्या पेशा है।व्यक्तिगत जानकारियों से जुड़ी सूचनाओं के आधार पर बंदी से काम लेने और उसे जेल में चल रहे विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सेदारी देने, विशिष्ट बैरक में रखने आदि पर निर्णय होता है। लेकिन कोरोना संक्रमण का दौर आने के बाद वर्तमान व्यवस्था में जेल में बैरक नंबर 18, 19, 20, 21 और 22 को क्वारंटीन बैरक में दस दिन तक रखा जाता है।



जेलर पंकज कुमार ने बताया कि कोरोना संक्रमण के खतरों को देखते हुए जेल प्रशासन ने अनिवार्य कर दिया है कि बंदी से मिलने आने वाले मुलाकाती अपना आधार कार्ड के साथ ही आरटीपीसीआर की निगेटिव जांच रिपोर्ट भी साथ लाएं। तभी उनकी बंदी से मुलाकात कराई जा सकेगी, विचाराधीन बंदी से सप्ताह में अधिकतम दो मुलाकात की अनुमति है।