तेल अवीव / येरुशलम:
इजराइल में आम चुनावों के बाद सरकार गठन को लेकर बना सियासी गतिरोध अब एक नए संवैधानिक मोड़ पर पहुंच गया है। 120 सीटों वाली संसद ('नेसेट') में किसी भी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत न मिलने के बाद, अब विपक्ष देश में प्रधानमंत्री के सीधे चुनाव (Direct Election of Prime Minister) का नया प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है।
हिब्रू मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, विपक्षी दलों के इस रणनीतिक कदम का मुख्य उद्देश्य अरब पार्टियों के समर्थन के बिना एक स्थिर अल्पमत (Minority) सरकार का गठन करना है।
क्या है नया प्रस्ताव और कैसे काम करेगी व्यवस्था?
- सीधा जनादेश (Direct Vote):
- प्रस्तावित कानून लागू होने पर मतदाता आम संसदीय चुनाव से अलग, सीधे तौर पर अपने पसंदीदा प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार को वोट दे सकेंगे।
- बहुमत की अनिवार्यता से राहत:
- इस नई व्यवस्था के तहत जो उम्मीदवार सीधे चुनाव में जीत हासिल करेगा, उसे संसद (नेसेट) में 61 सीटों के पूर्ण बहुमत के बिना भी अल्पमत सरकार बनाने का वैधानिक अधिकार प्राप्त होगा।
- राजनीतिक निर्भरता समाप्त:
- इस कदम से सरकार बनाने की प्रक्रिया में अरब राजनीतिक दलों के समर्थन या मध्यस्थता की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी, जो वर्तमान गतिरोध की मुख्य वजहों में से एक है।
चुनाव नतीजे और वर्तमान गतिरोध
हाल ही में मंगलवार को संपन्न हुए चुनावों के बाद इजराइली राजनीति में गहरा अनिश्चितता का माहौल है:
- बहुमत से दूर दोनों धड़े: कार्यवाहक प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का दक्षिणपंथी गठबंधन और उनके विरोधी विपक्षी दल—दोनों ही 120 सीटों वाली नेसेट में जादुई आंकड़ा (61 सीटें) छूने में विफल रहे हैं।
- संसदीय गतिरोध: किसी भी पक्ष के पास अकेले या अपने पारंपरिक सहयोगियों के साथ मिलकर सरकार बनाने का जनादेश नहीं है, जिससे देश एक बार फिर राजनीतिक अस्थिरता के मुहाने पर खड़ा हो गया है।
नेतन्याहू भी दे चुके हैं ऐसा ही विचार
इजराइल के राजनीतिक इतिहास में प्रधानमंत्री के सीधे चुनाव की अवधारणा नई नहीं है:
- इससे पहले मार्च 2021 के चुनावों के बाद भी जब किसी दल को बहुमत नहीं मिला था और नेतन्याहू सरकार बनाने के लिए जरूरी समर्थन जुटाने में असमर्थ रहे थे, तब खुद बेंजामिन नेतन्याहू ने भी इसी प्रकार के सीधे चुनाव का सुझाव दिया था।
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संवैधानिक चुनौती: 'बेसिक लॉ' में संशोधन आवश्यक
इजराइल में सरकार गठन की प्रक्रिया देश के अर्ध-संवैधानिक ढांचे ‘बेसिक लॉ: द गवर्नमेंट’ (Basic Law: The Government) के तहत संचालित होती है।
- 61 सांसदों का समर्थन जरूरी: मौजूदा कानून के अनुसार, किसी भी नई सरकार को शपथ ग्रहण से पूर्व संसद (नेसेट) में विश्वास मत हासिल करना अनिवार्य है।
- कानून में बदलाव: सीधे चुनाव की व्यवस्था लागू करने के लिए ‘बेसिक लॉ’ में संशोधन करना होगा, जिसके लिए संसद के कम से कम 61 सांसदों का समर्थन हासिल करना होगा।
वर्तमान स्थिति:
फिलहाल यह प्रस्ताव विपक्षी खेमे के भीतर शुरुआती चर्चा के स्तर पर है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या विपक्ष संसद में इस विधेयक को पारित कराने के लिए आवश्यक 61 सांसदों का समर्थन जुटा पाता है या नहीं। यदि यह कानून पास होता है, तो यह इजराइल की लोकतांत्रिक प्रणाली में एक युगांतरकारी बदलाव सिद्ध होगा।
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