नई दिल्ली / जिनेवा:
दुनिया भर में जलवायु परिवर्तन (Climate Change) और मौसम के बदलते मिजाज के बीच एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि 'अल नीनो' (El Niño) का सबसे तेज और विनाशकारी दौर अभी आना बाकी है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस भयावह मौसमी प्रभाव का असर फरवरी 2027 तक बना रह सकता है।
वर्तमान में अल नीनो वैश्विक स्तर पर जलवायु चर्चाओं के केंद्र में है। तापमान में अप्रत्याशित बढ़ोतरी, चक्रवाती तूफान, जंगलों की आग और बेमौसम भारी बारिश जैसी घटनाएं इसी प्राकृतिक उथल-पुथल का परिणाम हैं। दशकों में सबसे शक्तिशाली माने जा रहे इस अल नीनो चक्र पर दुनिया भर के वैज्ञानिक बारीक नजर बनाए हुए हैं।
क्या हैं 'अल नीनो' और 'ला नीना'?
अमेरिकी वैज्ञानिक एजेंसी NOAA (नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन) के अनुसार, ये दोनों घटनाएं ENSO (अल नीनो-सदर्न ऑसिलेशन) चक्र के विपरीत चरण हैं, जो आमतौर पर हर 3 से 7 साल में घटित होते हैं।
- अर्थ और उत्पत्ति: स्पेनिश भाषा में 'अल नीनो' का अर्थ होता है 'छोटा लड़का', जबकि 'ला नीना' का अर्थ है 'छोटी लड़की'।
- वैश्विक प्रभाव: हालांकि इन दोनों घटनाओं का जन्म प्रशांत महासागर में होता है, लेकिन इनका असर पूरी पृथ्वी के मौसम तंत्र को हिलाकर रख देता है। उदाहरण के लिए, जब प्रशांत महासागर की सतह का तापमान बदलता है, तो इसका सीधा असर भारत के मानसून, अफ्रीका के सूखे और अमेरिका व यूरोप में आने वाले भीषण तूफानों पर पड़ता है।
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कैसे बदलता है मौसम का मिजाज?
जलवायु विज्ञान के अनुसार, इन दोनों चरणों में हवाओं और समुद्र की धाराओं में नाटकीय बदलाव आता है:
- अल नीनो (गर्म चरण): इसमें सामान्य पूर्वी व्यापारिक हवाएं (Trade Winds) कमजोर हो जाती हैं या उल्टी दिशा में बहने लगती हैं। इसके कारण भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र का गर्म पानी पूर्व की ओर बढ़ने लगता है, जिससे वैश्विक तापमान में रिकॉर्ड बढ़ोतरी होती है।
- ला नीना (ठंडा चरण): इसके विपरीत, ला नीना के दौरान व्यापारिक हवाएं सामान्य से अधिक तेज हो जाती हैं। ये गर्म पानी को धकेलकर एशिया और ऑस्ट्रेलिया (पश्चिमी प्रशांत) की ओर ले जाती हैं, जबकि दक्षिण अमेरिका के तटीय इलाकों में समुद्र की गहराई से ठंडा व पोषक तत्वों से भरपूर पानी ऊपर आ जाता है।
क्या एक के बाद एक आते हैं ये चक्र?
ENSO चक्र का कोई निश्चित या तय समय-क्रम (Strict Alternating Pattern) नहीं होता। अक्सर अल नीनो के बाद ला नीना की स्थिति बनती है, लेकिन कभी-कभी जलवायु प्रणाली में एक ही चरण लगातार बना रह सकता है। ऐतिहासिक आंकड़ों के मुताबिक, 'ला नीना' की तुलना में 'अल नीनो' की घटनाएं अधिक बार और ज्यादा आक्रामक होती हैं।
मौजूदा मौसमी स्थिति (2025–2027):
WMO के नवीनतम पूर्वानुमानों के अनुसार, वर्ष 2025 के अंत में शुरू हुआ एक कमजोर 'ला नीना' प्रभाव 2026 की शुरुआत में ही समाप्त हो गया था। इसके बाद 2026 के मध्य तक स्थितियां पूरी तरह बदल गईं और एक अत्यंत शक्तिशाली 'अल नीनो' का रूप ले लिया, जो अब अपने चरम की ओर बढ़ रहा है।
आगे क्या?
जब अल नीनो का यह चरम दौर कमजोर पड़ेगा, तब प्रशांत महासागर में एक और बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है। असामान्य रूप से गर्म समुद्र का तापमान अचानक ठंडा होकर 'ला नीना' में बदल सकता है। यह परिवर्तन धीरे-धीरे होता है, लेकिन जब होता है तो महाद्वीपों के मौसमी कैलेंडर को पूरी तरह उलट-पुलट कर रख देता है।
मौसम विशेषज्ञों और वैश्विक एजेंसियों ने सभी देशों को जलवायु आपात स्थिति से निपटने और कृषि, खाद्य सुरक्षा तथा जल संसाधनों के प्रबंधन के लिए पूर्व तैयारी करने की सलाह दी है।
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