वाशिंगटन / मास्को:
पाँचवें साल में प्रवेश कर चुके रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त कराने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक नई 'व्यापारिक कूटनीति' (Transactional Diplomacy) के रास्ते पर चल पड़े हैं। फाइनेंशियल टाइम्स की एक विस्फोटक रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन युद्ध रोकने के बदले रूस के साथ बड़े पैमाने पर तेल और अन्य औद्योगिक सौदों की रूपरेखा तैयार कर रहा है।
इस योजना के तहत अमेरिकी कंपनियों की रूसी तेल उद्योग में वापसी और यूरोप को फिर से रूसी तेल बेचने जैसी रियायतें शामिल हैं। हालाँकि, ये समझौते युद्ध के औपचारिक समापन के बाद ही लागू होंगे, लेकिन इस कदम से यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की और अमेरिकी प्रशासन के बीच मतभेद चरम पर पहुँच गए हैं।
सखालिन परियोजना और द्रुजबा पाइपलाइन को दोबारा शुरू करने की योजना
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और रूस के बीच दो प्रमुख वाणिज्यिक प्रस्तावों पर गहन चर्चा हुई है:
- सखालिन तेल परियोजना: रूस के सुदूर पूर्व में स्थित सखालिन तटवर्ती विशाल तेल व गैस परियोजना में काम दोबारा शुरू करना। (उल्लेखनीय है कि इसमें शामिल एकमात्र अमेरिकी दिग्गज कंपनी एक्सॉनमोबिल ने पिछले साल वापसी से इनकार किया था, लेकिन अब बदले माहौल में नई संभावनाएं तलाशी जा रही हैं)।
- द्रुजबा पाइपलाइन: यूरोप को द्रुजबा पाइपलाइन के जरिए फिर से रूसी कच्चे तेल की आपूर्ति बहाल करना।
- विमानन और टाइटेनियम क्षेत्र: विमान निर्माण में इस्तेमाल होने वाले टाइटेनियम के उत्पादन में साझा सहयोग और अमेरिकी एयरलाइंस के लिए रूसी हवाई क्षेत्र (Airspace) के इस्तेमाल पर भी बात चल रही है, जिससे ईंधन लागत में बड़ी बचत होगी।
इन वार्ताओं को ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ आगे बढ़ा रहे हैं, जिन्होंने हाल ही में मॉस्को में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से सीधी मुलाकात की थी। हालाँकि, विटकॉफ के इस 'नरम रुख' की अमेरिका में रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों दलों के नेता तीखी आलोचना कर रहे हैं।
अबू धाबी में होगी निर्णायक त्रिपक्षीय बैठक
वाशिंगटन को उम्मीद है कि अगले महीने अबू धाबी में अमेरिका, रूस और यूक्रेन के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच एक उच्चस्तरीय शांति वार्ता आयोजित होगी। यदि यह बैठक होती है, तो यह फरवरी के बाद तीनों देशों के बीच पहली सीधी वार्ता होगी। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ये व्यावसायिक सौदे शांति वार्ता का मुख्य आकर्षण और मुख्य 'इंसेंटिव' (प्रोत्साहन) होंगे।
ट्रंप और जेलेंस्की के संबंधों में अभूतपूर्व तनाव
रूस के साथ अमेरिकी कूटनीति की इस नई दिशा ने कीव (यूक्रेन) को बेहद असहज और क्रुद्ध कर दिया है। जेलेंस्की और ट्रंप प्रशासन के बीच दरार बढ़ने के प्रमुख कारण:
- रूसी तेल पर खरीद: हाल ही में ट्रंप द्वारा रूस से हजारों बैरल डीजल खरीदने की मंजूरी देने से यूक्रेन और उसके यूरोपीय सहयोगी स्तब्ध रह गए थे।
- ड्रोन हमलों पर रोक का दबाव: अमेरिका ने रूस के ऊर्जा निर्यात पर नए प्रतिबंध लगाने की योजना टाल दी है और यूक्रेन पर दबाव बना रहा है कि वह रूसी तेल रिफाइनरियों पर अपने लंबी दूरी के ड्रोन हमले रोके। यूक्रेन ने इस मांग को खारिज कर दिया है।
- सैन्य व तकनीकी सहायता में अड़चनें: यूक्रेन को अमेरिकी खुफिया जानकारी (Intelligence Sharing) मिलने में आ रही रुकावटों और स्टारलिंक (Starlink) सैटेलाइट सेवाओं की पहुँच सीमित होने की खबरों से जेलेंस्की प्रशासन में भारी नाराजगी है।
यूरोपीय नेताओं की पहल और पुतिन का रुख
इसी बीच, फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब और नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गार स्टोर ने रूसी राष्ट्रपति पुतिन से 90 मिनट लंबी फोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं ने युद्ध को तुरंत रोकने और तनाव घटाने पर जोर दिया। दूसरी ओर, क्रेमलिन के अनुसार, राष्ट्रपति पुतिन ने स्पष्ट किया कि युद्ध के लंबे खींचने के लिए पश्चिमी देशों की टकराव वाली नीतियां और यूक्रेन को दी जा रही उकसावे वाली सैन्य मदद ही मुख्य रूप से जिम्मेदार है।
#UkraineRussiaWar #TrumpPutinDeal #ZelenskyVsTrump #GlobalPolitics #USRussiaOil #SakhalinProject #AbuDhabiPeaceTalks #WorldNewsHindi





