श्रीहरिकोटा/बेंगलुरु:

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में भारत की संप्रभुता और आत्मनिर्भरता को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तैयार है। इसरो द्वारा नेक्स्ट-जेनरेशन नेविगेशन सैटेलाइट NVS-03 को सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया जा रहा है। इस उपग्रह को भारत के भारी-भरकम रॉकेट GSLV-F18 के जरिए जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (GTO) में स्थापित किया जाएगा। यह GSLV प्रोग्राम की 20वीं उड़ान है।

इस मिशन का मुख्य उद्देश्य भारत के अपने स्वदेशी नेविगेशन सिस्टम NavIC (Navigation with Indian Constellation) को सुदृढ़, अधिक सटीक और अधिक व्यापक बनाना है।

क्या है NavIC और क्यों है यह खास?

NavIC भारत की अपनी उपग्रह आधारित लोकेशन और नेविगेशन व्यवस्था है। यह भारत की मुख्य भूमि के साथ-साथ देश की सीमाओं से लगभग 1,500 किलोमीटर तक के दायरे में सटीक स्थिति, दिशा और समय से जुड़ी सेवाएं प्रदान करता है। अभी तक भारत समेत दुनिया के कई देश अमेरिकी 'GPS' पर निर्भर रहे हैं, लेकिन NavIC का विस्तार भारत को रणनीतिक और नागरिक दोनों मोर्चों पर पूरी तरह आत्मनिर्भर बना रहा है।

NVS-03 की तकनीकी खासियतें

  1. स्वदेशी अटॉमिक क्लॉक (Atomic Clock):
  2. नेविगेशन प्रणालियों में समय की सटीकता का सबसे बड़ा महत्व होता है। जब सैटेलाइट से सिग्नल भेजा जाता है, तो जमीन पर मौजूद डिवाइस सिग्नल पहुंचने में लगे समय से ही लोकेशन तय करता है। इसमें एक सेकंड के छोटे से हिस्से की गलती भी बड़ी दूरी का फर्क पैदा कर सकती है। NVS-03 में भारत की अपनी स्वदेशी तकनीक से निर्मित अटॉमिक क्लॉक लगाई गई है, जो बेहद सटीक समय गणना सुनिश्चित करेगी।
  3. नया L1 सिग्नल और व्यापक डिवाइस अनुकूलता:
  4. इससे पहले NavIC केवल L5 और S-बैंड सिग्नलों का इस्तेमाल करता था। NVS-03 में नया L1 सिग्नल शामिल किया गया है। L1 सिग्नल दुनिया भर के सामान्य नागरिक उपकरणों जैसे स्मार्टफोन, स्मार्टवॉच और कार नेविगेशन सिस्टम में सबसे व्यापक रूप से इस्तेमाल होता है। इससे आम नागरिकों के मोबाइल डिवाइस में NavIC का सीधा और निर्बाध इस्तेमाल संभव हो सकेगा।

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देश और आम नागरिकों को मिलने वाले मुख्य फायदे

  • दैनिक परिवहन और वाहन नेविगेशन: गाड़ियों, कैब और निजी वाहनों में अधिक सटीक और रियल-टाइम नेविगेशन की सुविधा मिलेगी।
  • रेलवे और उड्डयन: ट्रेनों की रियल-टाइम लोकेशन ट्रैकिंग, सुरक्षित रेल संचालन और विमानन क्षेत्र में समय प्रबंधन को अधिक सटीक बनाया जा सकेगा।
  • समुद्री सुरक्षा और नाविक: हिंद महासागर क्षेत्र में जहाजों, मछुआरों और नौकाओं को सटीक दिशा-निर्देश और आपातकालीन चेतावनी प्रणाली मिलेगी।
  • पावर ग्रिड और दूरसंचार: बिजली व्यवस्था (Power Grid) के समय तालमेल और दूरसंचार नेटवर्क के संचालन में अटॉमिक क्लॉक का सटीक समय बहुत सहायक सिद्ध होगा।
  • राष्ट्रीय सुरक्षा: रणनीतिक, सैन्य और आपातकालीन आपदा प्रबंधन सेवाओं के लिए विदेशी नेटवर्क पर निर्भरता समाप्त होगी।

GPS से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता भारत

विश्व में अमेरिका का GPS, रूस का GLONASS, यूरोप का Galileo और चीन का BeiDou जैसी प्रणालियां मौजूद हैं। NavIC नेटवर्क को पूरी क्षमता से काम करने के लिए न्यूनतम सक्रिय उपग्रहों की आवश्यकता होती है। NVS-03 के लॉन्च के बाद इस श्रृंखला में आगे NVS-04 और NVS-05 भी शामिल किए जाएंगे, जिससे भारत का अपना नेविगेशन तंत्र और भी अधिक अभेद्य और विश्वसनीय बन जाएगा।

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