देवघर।बिलासी टाउन के प्रोफेसर कालोनी के चंद्र विजय प्रसाद चंदन ने कहा कि रवि प्रकाश को तब से जानता हूं जब वे प्रभात खबर पटना संस्करण के लिए लिखते थे।अविनाश चंद्र मिश्र और दीपक कोचगवे के साथ बैठे विचार विनिमय के दौरान उनकी संवेदना बार-बार मुखर होती देखी थी मैने।





चंद्र विजय ने कहा कि मैं तब जसीडीह डेटलाइन से प्रभात खबर के लिए लिखता था।जब रवि प्रकाश प्रभात खबर के संपादक बन कर आए एक दो बार ही बातें हुई किंतु जिस दिन हद हदिया पुल के समीप बच्चों के साथ जल मरने की घटना हुई थी तब वे मुझसे फोन करके इस स्न्त्रास भरी वेदना को कविता में लिखने को कहा,मैने लिखा और जब उन्हें देने गया तो इस घटना पर उनकी आंखों के कोरों पर आंसू की बूंदें झिलमिलाते देखा था।





उस आंसू की बूंदों को समझता था मैं,उनके वह आंसू बूंद अब भी अंतरभुक्त हैं मुझमें।क्या कहूं उनके बारे में सिर्फ एक वाक्य पर्याप्त हैं।





कालजयी रविप्रकाश





प्रखंड पुंज प्रकाश का,रवि आलोकित कर गया





वेदना के व्योम में वह,ऊष्मा अरुण का भर गया





मौन मुखर साधक बन,रुग्ण दशा में लड़ता रहा





कालजीवी हो रविरथी,महाप्रयाण भले कर गया





व्यथा की छाती पर वह,अमरबेल सा पसर गया





नवांकुर नित्य पल्लवित हो,वो ऐसा ही कर गया





देखा था झिलमिल अश्रु,जली मां बच्चों के साथ





ऋण जाल के पाश में,गोलू,मोलू सोनू ठहर गया





प्राणोत्सर्ग का कृत्य वो,रवि ह्रदय आर्द्र कर गया





संवेदना के तरणताल में,मुझे निवेदित कर गया





विरचित कवि कल्पना को,उसने माध्यम बनाया





स्वर भले ही मौन रहे,मानवता किन्तु कहर गया