रांची।हैवी इंजीनियरिंग कार्पोरेशन लिमिटेड
कामगारों के वेतन भुगतान पर गुरुवार को प्रबंधन और श्रमिक संगठनों के बीच हुई वार्ता विफल रही। प्रभारी सीएमडी नलिन सिंघल ने कहा कि दिसंबर में एक महीने का वेतन देने की कोशिश की जाएगी अगर पैसा नहीं रहा तो 50 फीसदी वेतन दिया जाएगा।वेतन भुगतान समेत सभी खर्च फिलहाल एचईसी को अपने संसाधनों से ही पूरा करना होगा।केंद्र सरकार से फिलहाल कोई आर्थिक मदद नहीं मिलेगी।

प्रबंधन के इस प्रस्ताव को श्रमिक संगठनों ने नकार दिया। इसके बाद प्रभारी सीएमडी ने दूसरे दौर की वार्ता में इस पर चर्चा करने की बात कही।लेकिन तीन बजे मुख्यालय से निकलने के बाद वे दोबारा नहीं आए। वे दिल्ली जाने के लिए एयरपोर्ट चले गए। श्रमिक संगठनों ने सीएमडी के इस रवैये की आलोचना की। शुक्रवार से कामगारों का आंदोलन जारी रहेगा। कामगारों ने साफ कह दिया है कि जब तक एक मुश्त वेतन नहीं मिलेगा, वे काम नहीं करेंगे।

एचईसी मुख्यालय में बैठक दोपहर 1.30 बजे शुरू हुई। इसमें सीएमडी ने श्रमिक संगठनों से पूछा कि एचईसी को चलाने की क्या योजना है। इस पर श्रमिक संगठनों ने कहा कि केंद्र सरकार तय करेगी कैसे चलेगा। आधुनिकीकरण का सभी कार्य केंद्र सरकार को करना है और इसके लिए राशि भी वही देगी। कामगार उत्पादन कर रहे हैं। सभी सुविधाओं में कटौती के बावजूद वह ईमानदारी से काम कर रहे हैं। लेकिन बिना वेतन के काम करना संभव नहीं है। कामगारों को तत्काल बकाया वेतन चाहिए।

सीएमडी ने कहा कि कंपनी की वर्तमान अर्थिक हालात बेहतर नहीं है और बकाया वेतन देना संभव नहीं है। इस पर श्रमिक नेताओं ने कहा कि मैनेजमेंट एक माह का वर्तमान वेतन और एक माह का बकाया वेतन का भुगतान करे। बकाया वेतन का कब तक भुगतान होगा एक निर्धारित तारीख बताए। इस पर प्रबंधन ने अपना पक्ष नहीं रखा। सीएमडी ने दूसरे दौर की बैठक में इस पर विचार करने को कहा। तीन बजे के बाद बैठक स्थगित कर दी गयी और दूसरे दौर की बैठक एक घंटा बाद तय की गयी।

यूनियनों ने बताया कि वेतन न मिलने से कामगार बच्चों की फीस नहीं दे पा रहे हैं। एचईसी परिसर में स्थित स्कूल भी फीस लेने के लिए दबाव बना रहे हैं। स्कूलों को फीस न देने पर कामगारों के बच्चों का नाम नहीं काटने का निर्देश देने की मांग की गयी है। कैंटीन भत्ता जारी रखने और बकाया भत्ते का भुगतान करने की भी मांग की गयी। प्रबंधन ने बच्चों का नाम नहीं काटने का निर्देश देने का आश्वासन दिया। अगले सप्ताह से कैंटीन शुरू करने की बात भी कही गयी।

मैनेजमेंट ने श्रमिक संगठनों को मुख्यालय में ही रुकने को कहा, ताकि दूसरे दौर की वार्ता हो सके। मगर मैनेजमेंट ने दूसरे दौर की वार्ता के लिए श्रमिक संगठनों को नहीं बुलाया, श्रमिक नेताओं को मुख्यालय से वापस लौटना पड़ा। पता चला कि प्रभारी सीएमडी एयरपोर्ट से दिल्ली चले गए।

मुख्यालय में कर्मचारियों की मांगों पर बातचीत हो रही थी, दूसरी तरफ कर्मचारी मुख्यालय के सामने प्रबंधन विरोधी नारे लगा रहे थे। श्रमिक संगठनों को कर्मचारियों ने साफ शब्दों में कहा कि जबतक बकाया वेतन नहीं मिलेगा, तबतक कोई समझौता मंजूर नहीं है। वेतन मिलने के बाद ही कर्मचारी काम पर वापस लौटेंगे।