प्रतिनिधि,जमशेदपुर।महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कॉलेज अस्पताल में पूर्व में संचालित ठेका कंपनी शिवा प्रोटेक्शन फोर्स प्राइवेट लिमिटेड पर सामाजिक कार्यकर्ता दर्श चौधरी ने कई सारे आरोप लगाए हैं। जिसकी जांच करने के लिए बुधवार एक्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट सुमित प्रकाश के नेतृत्व में एक टीम अस्पताल पहुंची। इस दौरान उन्होंने एमजीएम अधीक्षक डॉ रविंद्र कुमार से इस संदर्भ में पूरी जानकारी हासिल की। इस दौरान कुछ कागजातों के नहीं मिलने पर उन्होंने दोबारा जांच के लिए आने की बात भी कही।
बताते चलें कि पूर्व में ठेका कंपनी शिवा प्रोटेक्शन फोर्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा एमजीएम अस्पताल में मैनपावर की सप्लाई की जाती थी। इस दौरान एजेंसी पर भारतीय प्रशासनिक सुधार एवं जन शिकायत परिषद द्वारा कई सारे आरोप लगाते हुए झारखंड के मुख्य सचिव से इसकी शिकायत भी की गई थी। जिसके बाद उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए उपायुक्त को जांच करने का निर्देश भी दिया था। वहीं परिषद ने एजेंसी को काली सूची में डालने की मांग भी की है।उन्होंने एजेंसी पर आपराधिक षडंयत्र रचने, फर्जी दस्तावेजों को असली बताकर निविदा प्राप्त करने, फर्जी बिल देकर करोड़ों रुपए की धोखाधड़ी करने, सरकारी अस्पताल परिसर की विधि-व्यवस्था ठप कर सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न करने समेत अन्य आरोप लगाए गए हैं।
परिषद ने अपने आरोपों में कहा है कि मेसर्स शिवा प्रोटेक्शन फोर्स प्राइवेट लिमिटेड ने वित्तीय वर्ष 2018-19 में आउटसोर्स का काम लेने के लिए हजारीबाग सिविल सर्जन कार्यालय में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर निविदा भरा था। साथ ही जिसे अयोग्य बताते हुए तत्काल रद्द भी कर दिया गया था। वहीं तत्कालीन प्रधान सचिव डॉ नितिन मदन कुलकर्णी ने नियमों के विरुद्ध निविदा लेने के साथ साथ फर्जी दस्तावेजों को प्रस्तुत करने के कारण मेसर्स शिवा प्रोटेक्शन फोर्स प्राइवेट लिमिटेड को कार से हटाकर दूसरी एजेंसी को कार्यादेश निर्गत करने का आदेश जारी किया गया था। बावजूद इसके वर्ष 2018-19 में ही जिन दस्तावेजों को फर्जी बताते हुए हजारीबाग सिविल सर्जन कार्यालय से मेसर्स शिवा प्रोटेक्शन फोर्स प्राइवेट लिमिटेड को कार्यमुक्त किया गया था। उन्हीं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उसने वर्ष 2018-19 में ही एमजीएम अस्पताल में निविदा ले ली। अब सोचने वाली बात यह है कि जिंदा दस्तावेजों को हजारीबाग सिविल सर्जन कार्यालय ने फर्जी करार दिया था। उन्हीं दस्तावेजों को एमजीएम अस्पताल की चयन समिति ने कैसे सही करार दे दिया। यह पूरी तरह जांच का विषय है।





