कानपुर।भारत में प्लास्टिक पर पाबंदी की मांग ज़ोर-शोर से उठती रही है।भारत ही क्यों दुनिया के कई देशों में इस पर पाबंदी लगी है।वैसे इस पाबंदी पर भी शर्तें लागू हैं,लेकिन आज प्लास्टिक को दुनिया में इंसानियत ही नहीं हर तरह के जीव के लिए दुश्मन के तौर पर देखा जाता है।प्लास्टिक के कचरे से पूरी दुनिया परेशान है।समंदर हो या नदियां,पहाड़ हों, दूर स्थित द्वीप हों या मैदान,हर जगह प्लास्टिक के कचरे से प्रदूषण और पर्यावरण को भारी नुक़सान हो रहा है।आधुन‍िकता की दौड़ में ये ऐसा प्रयोग है।ज‍िससे पूरी दुन‍िया छुटकारा चाहती है।इसके व‍िकल्‍पों की खोज हो रही है।





भोपाल के व‍िप‍िन त्र‍िपाठी ने प्‍लास्‍ट‍िक कचरे से बायोडीजल बनाने की एक मशीन तैयार की है।इसी महीने कानपुर में प्‍लास्‍ट‍िक कचरे से बायोडीजल बनाने का प्‍लांट भी शुरू हो जाएगा।कंपनी दावा कर रही है क‍ि इस मशीन से प्‍लांट लगने से प्रदूषण को कम करने के साथ ही हर रोज 2500 लीटर बायोडीजल भी तैयार क‍िया जाएगा।ये डीजल बाजार में उपलब्‍ध डीजल से लगभग 10 से 15 रुपए प्रत‍िलीटर तक सस्‍ता होगा।वहीं बायोवेस्‍ट को कोयले के स्‍थान पर प्रयोग क‍िया जा सकेगा।





3 करोड़ की लागत से लगता है प्‍लांट





कानपुर के पनकी क्षेत्र में लगभग डेढ़ करोड़ रुपए की लागत से इस प्‍लांट को पीपीपी (पब्‍ल‍िक प्राइवेट पार्टनरश‍िप) मॉडल पर लगाया जा रहा है। प्‍लांट के संचालन की ज‍िम्‍मेदारी मध्‍य प्रदेश के भोपाल में स्‍थाप‍ित पव‍ित्र वेस्‍ट मैनेजमेंट को सौंपा गया है।इस संबंध में डायरेक्‍टर व‍िप‍िन त्र‍िपाठी ने इस प्‍लांट को स्‍थाप‍ित करने में आने वाली लागत के बारे में बताया क‍ि तकरीबन 3 करोड़ रुपए की लागत आती है।





विपिन त्रिपाठी ने बताया क‍ि ये प्‍लांट दो स्‍टेज में लगता है। पहले स्‍टेज की मशीन को लगाने में एक से डेढ़ करोड़ रुपए की लागत आती है।इसकी मदद से प्‍लास्‍ट‍िक से कच्‍चा तेल बनाया जाता है।इसे एलडीओ (लाइट डीजल ऑयल) यानी पायरोल‍िस‍िस ऑयल का न‍िर्माण करती है।वहीं‌ दूसरे स्‍टेज की मशीन एलडीओ से बीएस-6 स्‍टैंडर्ड के डीजल और पेट्रोल में कन्‍वर्ट करती है। इसे स्‍थाप‍ित करने की लागत भी लगभग डेढ़ करोड़ रुपए आती है।





विपिन ने अपने कॅर‍ियर के बारे में बताया कि‍ वह नेवी में लेफ्ट‍िनेंट कमांडर के पद से र‍िटायर्ड हैं।अपनी नौकरी के दौरान उन्‍होंने पाया क‍ि भारत में गंदगी और कचरे को लेकर दुन‍िया में अच्‍छी छव‍ि नहीं थी।वे यह भी मानते हैं क‍ि बीते कुछ साल से इस द‍िशा में तेजी से काम क‍िया जा रहा है।उन्‍हें अपनी नौकरी के दौरान हमेशा यही लगता रहा क‍ि वे देश को स्‍वच्‍छ बनाने के ल‍िए कुछ नया करना चाहते हैं। इसी प्रेरणा के साथ उन्‍होंने इस मशीन को बनाने के बारे में सोचा।





व‍िप‍िन बताते हैं क‍ि उन्‍होंने अपने र‍िटायरमेंट के बाद लगभग दो साल तक मशीन से डीजल बनाने का प्रयास क‍िया।उस बीच वे लगभग 26 बार असफल भी हुए।इस दौरान लगभग 25 लाख रुपए उन्‍होंने खर्च कर द‍िए। उन्होंने मशीन को 2017 में ही पेटेंट के ल‍िए अप्‍लाई क‍िया था और 2022 में मशीन का पेटेंट म‍िल गया।इसके बाद पायलट प्रोजेक्‍ट के तहत बने बायोडीजल को ऑटो चालकों को बेचा गया। सफलता म‍िलने के बाद इस प्रोजेक्‍ट को अब वे व‍िस्‍तार दे रहे हैं।





विपिन ने बताया क‍ि मध्‍य प्रदेश के व‍िद‍िशा में फ‍िलहाल बायोडीजल का न‍िर्माण क‍िया जा रहा है। आमतौर पर 1 क‍िलोग्राम प्‍लास्‍ट‍िक से लगभग 400 एमएल डीजल बनाया जाता है। उन्होंने बताया कि कंपनी का कानपुर में प्रत‍िद‍िन 5 टन प्‍लास्‍ट‍िक कचरे से 2500 लीटर डीजल बनाने का करार हुआ है।आने वाले समय में इसकी सीमा को बढ़ाया भी जा सकता है।





डायरेक्‍टर व‍िप‍िन त्र‍िपाठी ने बताया क‍ि इस प्‍लास्‍ट‍िक कचरे में घरों से न‍िकलने वाली पन्‍नी, प्‍लास्‍ट‍िक के ड‍िब्‍बे और बॉटल्‍स आद‍ि से बायोडीजल बनाने का काम क‍िया जाएगा। उन्‍होंने अपने आगामी प्रोजेक्‍ट के बारे में बताया क‍ि कानपुर में प्‍लांट स्‍टार्ट होने के बाद झांसी और गोरखपुर में भी प्‍लांट शुरू करने की योजना है।लखनऊ में भी कंपनी का प्रयास है क‍ि वह ऐसा प्‍लांट स्‍थाप‍ित कर स्‍वच्‍छता म‍िशन को बढ़ावा दे।





आपको बता दें कि मीडिया में प्लास्टिक की वजह से फ़ैलते प्रदूषण को लेकर तमाम रिपोर्ट आती रहती हैं।बीबीसी के ब्लू प्लैनेट 2 शो में भी सर डेविड एटेनबरो ने समंदर में प्लास्टिक से पैदा हो रही परेशानियों के बारे में बताया था।जनता की बढ़ती फ़िक्र देखकर कई देशों की सरकारें और कंपनियां प्लास्टिक के बेतहाशा इस्तेमाल को रोकने के लिए कई क़दम उठा रही हैं, लेकिन बड़ा सवाल ये है कि आज हमें जिस तरह प्लास्टिक की लत लग गई है।उसमें बुनियादी तौर पर बदलाव कैसे लाया जा सकता है।