विशेष संवाददाता





हजारीबाग। अखिल भारतीय कायस्थ महासभा, हजारीबाग के तत्वाधान में स्थानीय जबरा रोड स्थित शंभू सिन्हा के आवास पर महान संत, पथ प्रदर्शक स्वामी विवेकानंद की 160 वी जयंती पर एक गोष्ठी का आयोजन हुआ। अखिल भारतीय कायस्थ महासभा, हजारीबाग जिला अध्यक्ष सुधा वर्मा ने दीप प्रज्ज्वलित कर विधिवत गोष्ठी का उद्घाटन किया। गोष्ठी में सम्मिलित सभी आमंत्रित सदस्यों ने विवेकानंद की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि प्रकट की। गोष्ठी की अध्यक्षता डॉ शोभा सहाय, संचालन कथाकार विजय केसरी एवं धन्यवाद ज्ञापन भोलानाथ बख्शी ने किया। इस अवसर पर स्वामी विवेकानंद के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया।





कार्यक्रम का शुभारंभ शंभू सिन्हा के वक्तव्य से हुआ। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। साथ ही उन्होंने यह कहा कि स्वामी विवेकानंद एक आध्यात्मिक गुरु के साथ युग दृष्टा भी थे। उनका संपूर्ण जीवन समाज के नवजागरण में बीता था। वे भारत को विश्व पटल पर एक प्रमुख देश के रूप में स्थापित करना चाहते थे । आज उनका सपना सच होता दिख रहा है।





विषय प्रवेश कराते हुए कथाकार विजय केसरी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद देश के महानतम संतों में एक थे ।वे विश्व के बड़े पथ प्रदर्शक के रूप में जाने जाते हैं। स्वामी विवेकानंद जागृत भारत के प्रथम शंखनाद कर्ता थे। उनकी शंखनाद की ध्वनि आज भी विश्व भर में गुंजित हो रही है।





अध्यक्षता करते हुए डॉ. शोभा सहाय ने कहा कि स्वामी विवेकानंद समाज के सभी वर्ग के लोगों के लिए शिक्षा अनिवार्य बताया था। उनके वक्तव्य का यह प्रभाव हुआ कि तत्कालीन समाज पर इसका बहुत ही अनुकूल प्रभाव पड़ा। फलस्वरूप भारत की बच्चियों और महिलाओं में जागरण उत्पन्न हुआ । आज हमारी बच्चियां बड़ी-बड़ी नौकरियों में प्रतिनिधित्व कर रही हैं। इसके बावजूद हमारी बेटियां असुरक्षित हैं। इस पर शासन-प्रशासन को ध्यान देने की जरूरत है।





कायस्थ महासभा की जिला अध्यक्षा सुधा वर्मा ने कहा कि स्वामी विवेकानंद के विचार सकल समाज के लिए अनुकरणीय है । उनके विचारों में नवचेतना और जीवन की जागृति निहित है। आज की बदली परिस्थिति में उनके विचारों पर चलकर भारत को विश्व गुरु बनाया जा सकता है।





इतिहास के पूर्व प्राध्यापक डॉक्टर गोपाल जी ने बताया कि आज भारत सरकार जो नई शिक्षा नीति लागू करने जा रही है, यह नीति स्वामी विवेकानंद के शिक्षा पर दिए गए भाषण 'पंचकोशी' पर आधारित है। स्वामी विवेकानंद एक दूरदर्शी आध्यात्मिक संत के साथ नवजागरण के पुरोधा थे। उन्होंने भारत के गौरवशाली इतिहास को शिकागो स्थित विश्व धर्म सभा में प्रस्तुत कर भारत के गौरव को बढ़ाया था।





हिंदी की पूर्व प्राध्यापिका पूनम ने कहा कि स्वामी विवेकानंद के विचार कालजई बन चुके हैं।जब तक दुनिया अस्तित्व में रहेगी, स्वामी जी के विचार लोगों को प्रेरित करते रहेंगे । स्वामी जी आधुनिक भारत के नव निर्माता थे। उनके विचारों में नूतनता के साथ दर्शन छुपा हुआ है ।‌ उनके विचारों को जितनी बार भी लोग पढ़ेंगे, हर बार एक नई चेतना और जानकारी मिलेगी।





भोलानाथ बख्शी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद देश के एक महान संत थे। उन्होंने जिस कालखंड में अपनी बातों को रखा था, देश पराधीन था।पराधीन भारत वासियों के प्रति पश्चात्य देशों की सोच को बदलने की दिशा में उनका व्याख्यान सदा याद किया जाता रहेगा।





भाजपा के वरिष्ठ नेता दीपक नाथ सहाय ने कहा कि स्वामी विवेकानंद के विचार हमेशा लोगों को जागृत करते रहेंगे । उन्होंने वर्षों पूर्व जिस नवजागरण की बीज को बोया था, आज संपूर्ण भारत उसी नव जागृति के साथ अंकुरित और पुष्पित हो रहा है।





दर्शनशास्त्र की पूर्व प्राधायिका वीणा प्रसाद ने कहा कि स्वामी विवेकानंद एक महान दार्शनिक व्यक्ति थे। उन्होंने भारत के प्राचीन वेद, धर्म ग्रंथ और उपनिषदों का अध्ययन किया था। उनकी स्मरण शक्ति बहुत समृद्ध थी।उन्होंने सर्वप्रथम खुद को जाना। अपने गुरु से आदेश प्राप्त करने के बाद भारत के गौरवशाली इतिहास को विश्व मंच पर रखा था।फलत: भारत के प्रति विदेशी सोच को बदलने की दिशा में मील का पत्थर साबित हुआ था।





आयोजित कार्यक्रम में सुभाष चंद्र सिंहा, अनीता रानी, आशा कुमारी, अमित कुमार लाल, शशि भूषण प्रसाद, अमर कुमार सिन्हा, गोपी कृष्ण, जटाधर दुबे, रीता सिन्हा, सुषमा, शंकर जी, संध्या बख्शी, मिथिलेश कुमार, श्रवण कुमार, अमित कुमार आदि सम्मिलित हुए।