प्रतिनिधि,चरही,हजारीबाग। कोयला के काले खेल एवं अवैध खनन में कई लोगों की जान भी चली गई।विगत वर्ष ही तापिन साउथ एवं तापिन नॉर्थ कोलियरी में अवैध खनन के दौरान तीन लोगों की जान चली गई थी। इसके बावजूद कोयले की अवैध तस्करी पर लगाम नहीं लग पा रहा है।





चरही, आंगो व चुरचू थाना क्षेत्र से कोयला का अवैध धंधा वर्षों से होता आ रहा है।कोयले का काला खेल तीन चरणों में होता है। पहले चरण में बंद पड़े खदान या चालू खनन क्षेत्रों से एक गिरोह के सदस्य कोयला को एक स्थान पर एकत्रित करते हैं। दूसरे गिरोह के सदस्य एकत्रित कोयले को मोटरसाइकिल, पिकअप व ट्रैक्टर पर लोड कर गिरोह के संचालक के पास (हार्डकॉक भट्ठा या कोयला डीपू) पहुंचाते हैं। जहां से गिरोह का संचालक ट्रकों पर लोड कर इसे बिहार, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश भेजता है। राज्य के बाहर अवैध कोयला को वैध तरीके से भेजने के लिए फर्जी चालान भी तैयार किया जाता है या एक ही चालान के माध्यम से कई वाहन अवैध तरीके से बाहर भेजे जाते है।





हजारों लोगों के इस अवैध धंधे से जुड़े रहने का अनुमान





कोयले के अवैध कारोबार में चरही कोयलांचल क्षेत्र में हजारों लोगों के जुड़े रहने का अनुमान है। बताया जाता है कि हाल के वर्षाें में कोयले के अवैध कारोबार में जुड़े लोगों की संख्या बढ़ी है। प्रतिदिन दिहाड़ी मजदूरी करने वाले, राजमिस़्त्री और ठेला-खोमचे वाले कई लोग अब अपने मूल काम को छोड़कर इस धंधे में लग गए हैं। कोयले के अवैध कारोबार से जुड़ने का मुख्य कारण ये है कि प्रतिदिन उन्हें 8 घंटे मजदूरी करने पर 300 से 350 रुपये की दिहाड़ी मिलती है,लेकिन कोयले के धंधे में सिर्फ तीन घंटे ही काम करना पड़ता है। रात 10 बजे से लेकर 1 बजे तक मोटरसाइकिल,पिकअप व ट्रैक्टर पर कोयला लोड कर गंतव्य तक पहुंचाने पर 100 रुपये प्रति बोरी मिल जाता है।





तापिन साउथ, नॉर्थ और परेज अवैध खनन का केंद्र,रेलवे साइडिंग से भी होती है चोरी





चरही कोयलांचल क्षेत्र में कोयले के अवैध उत्खनन का केंद्र मुख्य रूप से तापिन साउथ, नॉर्थ और परेज है। जहां से प्रतिदिन सैकड़ों मोटरसाइकिलों की मदद से कोयले को लोड कर ले जाया जाता है। 14 माइल रेलवे साइडिंग से भी कोयला की चोरी भारी मात्रा में हो रही है। वहीं तस्करों का सबसे सुरक्षित जगह इंद्रा एवं रेलवे साइडिंग बताया जाता है।जहां छोटी बड़ी अनेकों वाहन से कोयले का अवैध कारोबार किया जाता है। सूत्रों की मानें तो अवैध कोयला कारोबार के लिए इंद्रा गढ़ माना जाता है।





अवैध खनन में कई लोगों की जान भी चली जाती है





कोयला के अवैध उत्खनन के दौरान कई लोगों की जान भी चली जाती है। लेकिन सबसे बड़ी विडम्बना है कि अवैध खनन में अपने परिवार के सदस्यों को खोने वाले लोग भी चुप्पी साध लेते हैं। हादसे में मरने वाले कोयले के ढेर में ही दफन हो जाते हैं या फिर परिवार के सदस्य शव को निकालने के बाद चोरी-छिपे अंत्येष्टि कर देते हैं। ऐसा इसलिए होता है कि कोयला चोरी करने पर खनन कंपनियों की ओर से उनके खिलाफ मुकदमा भी दर्ज किया जा सकता है। विगत वर्ष में तापिन परियोजना क्षेत्र में अलग-अलग घटनाओं में अवैध कोयला खनन के क्रम में कई लोगों की मौत हो गई है।