नई दिल्ली:

भारत में हालिया CJP प्रदर्शनों और मानवाधिकार के मुद्दों पर अमेरिका ने अपना स्पष्ट रुख साफ कर दिया है। तीन दिवसीय भारत दौरे पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यह भारत का आंतरिक मामला है और अमेरिका इसमें किसी भी प्रकार का दखल नहीं देगा। उनका यह बयान उन 6 अमेरिकी सांसदों की अपील के बाद आया है, जिन्होंने रूबियो से भारत दौरे के दौरान इस मुद्दे को उठाने की मांग की थी।

अमेरिकी सांसदों की मांग को किया दरकिनार

भारत दौरे से पहले छह अमेरिकी सांसदों (प्रमिला जयपाल, इल्हान उमर, जिम मैकगवर्न, रशीदा तलीब, एलेनोर होम्स नॉर्टन और जीसस गार्सिया) ने मार्को रूबियो से मुलाकात कर भारत में प्रदर्शनों और सरकार की कार्रवाई पर चिंता जताने की अपील की थी। हालांकि, अमेरिकी विदेश मंत्री ने इन मांगों को खारिज करते हुए दो टूक कहा कि अमेरिका में भी इस तरह के प्रदर्शन होते रहते हैं और यह पूरी तरह से भारत की संप्रभुता से जुड़ा मामला है।

मानवाधिकारों के मुद्दे पर भारत का कड़ा रुख

इससे पहले, संयुक्त राष्ट्र के कुछ विशेष रैपोर्टेयर्स ने भारत में प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई और मानवाधिकारों को लेकर चिंता जताई थी। इस पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताते हुए दो टूक कहा है:

  • राजनीतिक दबाव पर ऐतराज: भारत की ओर से स्पष्ट किया गया कि मानवाधिकारों के मुद्दों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने या चुनिंदा देशों को निशाना बनाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
  • तथ्यों पर आधारित चर्चा: भारत ने बिना जांचे-परखे और पूर्वाग्रह से ग्रसित आरोपों के आधार पर देश की छवि धूमिल करने के प्रयासों को खारिज करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में चर्चा पूरी तरह तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए।

इसे भी पढ़ेंः हार्वर्ड पूर्व छात्रों के बयान पर घमासान: दिल्ली पुलिस की कार्रवाई की निंदा पर कंवल सिब्बल ने उठाए सवाल

मार्को रूबियो का भारत दौरा और व्यापार समझौते पर बात

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो 20 अक्टूबर को तीन दिवसीय दौरे पर मुंबई पहुंचे, जहां उन्होंने भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ द्विपक्षीय बातचीत की।

  • व्यापार समझौता अंतिम चरण में: व्यापार समझौतों पर चर्चा करते हुए रूबियो ने बताया कि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते का लगभग 99 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है, और शेष बचे कुछ मुद्दों पर आपसी सहमति बनाने का प्रयास जारी है।
  • ऊर्जा सहयोग और अन्य मुद्दे: अपने इस दौरे के दौरान रूबियो ऊर्जा सहयोग बढ़ाने और वेनेजुएला के कच्चे तेल की प्रोसेसिंग से जुड़े विकल्पों पर भी चर्चा कर रहे हैं, साथ ही उनका गुजरात के जामनगर स्थित रिलायंस रिफाइनरी जाने का भी कार्यक्रम है।

अमरीकी विदेश मंत्री के इस स्पष्ट बयान से यह साफ हो गया है कि अमेरिका भारत के साथ अपने रणनीतिक, आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को प्राथमिकता दे रहा है और आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप से बच रहा है।

#MarcoRubio #IndiaUSRelations #SJaishankar #HumanRights #Geopolitics #USIndiaTrade #BreakingNewsInHindi