झारखंड की राजधानी रांची के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स के डॉक्टरों की अब गुप्तचर एजेंसियों के जरिए जासूसी कराई जाएगी। गुप्तचर एजेंसियों से जासूसी कराना प्राइवेट प्रैक्टिस करने वालों को पकड़ना है और डॉक्टरों की जानकारी जुटाकर रिम्स और विभाग को उपलब्ध कराएगी।इसके बाद तथ्यों के आधार पर डॉक्टरों पर कार्रवाई होगी।सोमवार को रिम्स की गवर्निंग बॉडी की बैठक में ये निर्णय लिया गया।



रिम्स के इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर करने को लेकर भी सहमति बनी है। इंफ्रास्ट्रक्चर में बदलाव के लिए 1250 करोड़ की अनुमानित राशि की खर्च पर मुहर लगाई गई है। इसके तहत चार भवनों का निर्माण किया जाएगा चाइल्ड और मेटरनिटी केयर के 250 से 300 बेड का भवन होगा। सुपरस्पेशलिटी वार्ड में बेडों की संख्या 700 करने के लिए एक नए भवन का निर्माण किया जाएगा।



पांच मंजिल के भवन का निर्माण चार हजार वर्ग फीट में होगा।जिससे ओपीडी में आने वाले मरीजों को अच्छा इलाज एक जगह मिल सकेगा।इस कार्ययोजना की स्वीकृति के लिए रिम्स के बाद अब मंत्रिमंडल को भेजा जाएगा।मंत्रिमंडल का निर्णय होने के बाद ही फाइनल मुहर का ठप्पा लगेगा। क्षेत्रीय नेत्र संस्थान के भवन को पूरा करने के लिए दोबारा टेंडर होगा।मौजूदा समय में काम कर रही एजेंसी को 54.17 लाख खर्च तक के काम को पूरा कराने के बाद ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा।



राज्य के जिन मरीजों के पास कोई कार्ड उपलब्ध नहीं है उन मरीजों को बिना पैसे चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए पांच लाख तक खर्च का प्रावधान किया होगा।इसके तहत रिम्स के चिकित्सा अधीक्षक के स्तर से विभागीय अध्यक्ष के अनुमोदन पर पचास हजार रुपये तक की राशि उपलब्ध कराई जाएगी।निदेशक स्तर से पचास हजार से एक लाख तक और विभागीय मंत्री के स्तर से एक लाख से पांच लाख तक की राशि उपलब्ध कराई जाएगी।



रिम्स में काम करने वाले कर्मी जो अस्थाई तौर पर रिम्स में पिछले दस साल या उससे अधिक से काम कर रहे हैं, उनको अब समायोजित किया जाएगा। रिम्स जीबी में लिए गए इस फैसले से करीब 75 लोगों को लाभ मिलेगा।पिछले दो साल से ये कर्मी अपनी मांग को लेकर जुटे थे। इसके अलावा ट्रामा सेंटर में मैनपावर की कमी को दूर करने के लिए आवश्यक पदों के सृजन की स्वीकृति दी गई है।



रिम्स जीबी की बैठक में रांची विश्वविद्यालय के नियम के आधार पर सभी विभागों में एचओडी रोटेशनल आधार पर होंगे और एक एचओडी का समय दो साल का होगा। रांची विश्वविद्यालय में एचओडी का रोटेशन दो साल का ही होता है।रिम्स प्रबंधन इस समय को तीन साल करने के लिए इस पर विचार कर रहा है।



रिम्स में पीपीपी मोड पर डायलिसिस यूनिट का अधिष्ठापन होगा और इसको लेकर मंत्रिमंडल की बैठक में स्वीकृत भी दे दी गई।राज्य में रिम्स में अब बीस बेड की डायलिसिस यूनिट लगेगी, जिसमें रिम्स के भर्ती और बाहरी मरीज दोनों की डायलिसिस की जाएगी। इसके अलावा रिम्स में ई अस्पताल के शुभारंभ की स्वीकृति मिली है, अब इसके संचालन के लिए ओपन टेंडर किया जाएगा।



बैठक के दौरान कैंसर मरीजों के पैटसीटी के लिए बर्लिन अस्पताल से करार किया गया है।इस निर्णय के तहत रिम्स में भर्ती कैंसर के मरीज बर्लिन अस्पताल में जाकर उपचार करा पाएंगे और इसके लिए उनको पैसे का भुगतान रिम्स करेगा। रिम्स में पैटसीटी मशीन की खरीदारी होने पर इसका लाभ मिल सकेगा।रिम्स अब अपना अभियंत्रण कोषांग का गठन करेगा। मंत्री ने बताया कि पहले रिम्स में अपना अभियंत्रण कोषांग हुआ करता था, जो भवन निर्माण के अधीन चला गया था। इस कोषांग के गठन की स्वीकृति दी गई है। इस कोषांग में एक्जीक्यूटिव, असिस्टेंट इंजीनियर, जूनियर इंजीनियर सहित अन्य कर्मियों की बहाली की जाएगी