नई दिल्ली:

वर्ष 2027 की आगामी जनगणना को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक जुबानी जंग तेज हो गई है। कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर बड़ा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि सरकार डेटा जुटाने वाले कर्मचारियों का दायरा बढ़ाकर अपना राजनीतिक एजेंडा साधने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस ने इस कदम को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के ट्रेनिंग कैंप और जनसांख्यिकीय बदलावों पर बनी एक विशेष समिति से जोड़ा है।

'जनगणना नियम, 1990' में बड़ा संशोधन

यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब केंद्र सरकार ने हाल ही में 'जनगणना नियम, 1990' में महत्वपूर्ण संशोधन किया।

  • क्या हुआ बदलाव?
  • नए संशोधन के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह अधिकार दिया गया है कि वे सरकारी सहायता प्राप्त (Aided) और बिना सहायता प्राप्त (Unaided) निजी संस्थानों के शिक्षकों को भी जनगणना अधिकारी के रूप में नियुक्त कर सकते हैं।

"यह RSS-BJP कार्यकर्ताओं के लिए रोजगार गारंटी योजना": जयराम रमेश

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर एक विस्तृत पोस्ट साझा कर सरकार के इस फैसले पर कड़े सवाल खड़े किए हैं।

"मोदी सरकार ने जनगणना 2027 के लिए डेटा जुटाने वाले कर्मचारियों की सूची का दायरा बढ़ा दिया है। इसके पीछे कोई बड़ी गड़बड़ी की आशंका है। इस कदम से हर 10 साल में होने वाली इस ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर आंच आ सकती है। यह expansion दरअसल हजारों RSS और BJP कार्यकर्ताओं के लिए एक तरह की रोजगार गारंटी योजना है।"
— जयराम रमेश, कांग्रेस महासचिव

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कांग्रेस के आरोपों के 3 मुख्य आधार

जयराम रमेश ने अपने आरोपों को सिद्ध करने के लिए तीन मुख्य घटनाक्रमों का हवाला दिया:

  1. बेलगाम में RSS का ट्रेनिंग कैंप:
  2. कांग्रेस नेता ने दावा किया कि 10 से 12 जुलाई, 2026 के बीच बेलगाम में आयोजित RSS के प्रशिक्षण शिविर में मुख्य रूप से 2027 की जनगणना पर ही ध्यान केंद्रित किया गया था।
  3. जनसांख्यिकीय बदलावों पर गठित समिति:
  4. 26 मई, 2026 को केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा गठित जनसांख्यिकीय (Demographic) बदलावों पर एक उच्च स्तरीय समिति ने 14 अक्टूबर को आम जनता, भारतीय और विदेशी संगठनों से सुझाव मांगे थे। रमेश का आरोप है कि इस समिति में नाम का ही 'उच्च स्तर' है, क्योंकि इसके सदस्य RSS के इकोसिस्टम से जुड़े हैं, जिससे यह साफ है कि सुझाव किस दिशा से आएंगे।
  5. संस्थाओं के अवमूल्यन का दावा:
  6. उन्होंने चिंता जताते हुए कहा, "यह फैसला पहले से प्रभावित जनगणना प्रक्रिया को और भी दूषित कर देगा। देश की एक और संवैधानिक संस्था बर्बाद हो रही है। SIR की ही तरह जनगणना के आंकड़ों के साथ भी खतरनाक तरीके से छेड़छाड़ की जा सकती है।"

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