रांची।ताजिकिस्तान में दो महीने से ज्यादा समय से फंसे झारखंड के प्रवासी मजदूर अब झारखंड वापस लौटेंगे।मजदूरों ने सोशल मीडिया के जरिए परिवार के सदस्यों के साथ बातचीत में आरोप लगाया था कि उन्हें बिजली पारेषण लाइन बिछाने के काम में लगाने वाली कंपनी ने उनके पासपोर्ट जब्त कर लिए और उन्हें पर्याप्त भोजन नहीं दिया और पैसे भी नहीं दिए।इसकी जानकारी एक अधिकारी ने मंगलवार को दी।





राज्य प्रवासी प्रकोष्ठ के अधिकारी ने कहा कि ताजिकिस्तान में फंसे 35 श्रमिकों में से 22 झारखंड लौट रहे हैं, जबकि शेष टिकट मिलने के बाद लौटेंगे। बाद में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य प्रवासी प्रकोष्ठ के एक ट्वीट को री-ट्वीट किया जिसमें कहा गया कि ताजिकिस्तान में भारतीय दूतावास से उनकी सुरक्षित वापसी के लिए संपर्क किया गया था।





तजाकिस्तान में फंसे झारखंड के गिरिडीह,हजारीबाग और बोकारो जिला के रहने वाले मजदूरों ने केंद्र और राज्य सरकार से सोशल मीडिया के जरिए झारखंड वापसी की गुहार लगाई थी।तजाकिस्तान में फंसे मजदूरों ने केंद्र और झारखंड सरकार के नाम त्राहिमाम संदेश भेजा था। मजदूरों ने अपने त्राहिमाम संदेश में कहा था कि वे जिस कंपनी में काम कर रहे हैं। वहां उन्हें 4 महीने से वेतन तक नहीं दिया गया है पैसे के अभाव में वे लोग दाने-दाने को मोहताज हैं।





तजाकिस्तान में फंसे झारखंड के 36 कामगारों में 14 कामगार अकेले हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ के रहने वाले हैं।यह कोई पहला मौका नहीं है इससे पूर्व पिछले वर्ष दिसंबर के महीने में भी तजाकिस्तान में झारखंड के 44 मजदूर फंस गए थ। इन्हें भी विष्णुगढ़ के खरना निवासी एजेंट पंचम महतो ने हीं भेजा था।हालांकि उस दौरान केंद्र व राज्य सरकार की पहल के बाद सभी मजदूरों को सुरक्षित वतन वापसी कराई गई थी।





विदेशों में बेहतर तनख्वाह की लालच देकर मजदूरों को अक्सर दलालों के द्वारा झांसे में लेकर विदेशों में भेज दिया जाता है, जहां उनसे कंपनी काम तो करवाती है,लेकिन बदले में उन्हें मेहनताना तक नहीं देती।सरकार को ऐसे मजदूरों के पलायन को रोकने के लिए बेहतर रोजगार की व्यवस्था करने की आवश्यकता है।