रांची।झारखंड में शराब की दुकानों में लगभग 60 से अधिक ब्रांडेड शराब बाजार से गायब हैं।दुकानों में मनपसंद ब्रांड की शराब की आपूर्ति न होने से बिक्री बाधित है।जिससे उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के राजस्व पर प्रभाव पड़ रहा है।





ब्रांडेड शराब न मिलने से झारखंड के छह जिलों के सहायक आयुक्त उत्पाद ने शराब आपूर्ति करने वाली कंपनियों, थोक विक्रेताओं से पत्राचार किया है।पत्राचार की कापी विभागीय अधिकारियों को भी दी है।बताया कि खुदरा दुकानों में मांग के अनुरूप शराब की आपूर्ति नहीं हो पा रही है,जिससे खुदरा उत्पाद दुकानों से बिक्री प्रभावित हो रही है।पूर्व में भी कई बार जिलों ने इससे संबंधित पत्राचार किया है,लेकिन इसका स्थाई समाधान नहीं निकल पाया है।





जिलों के सहायक उत्पाद आयुक्त ने इनसे पत्राचार किया है, जिसमें थोक शराब विक्रेता मेसर्स दिशिता वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स श्रीओम साईं बिवरेजेज प्राइवेट लिमिटेड, आयुक्त उत्पाद सह प्रबंध निदेशक झारखंड राज्य बिवरेजेज कारपोरेशन प्राइवेट लिमिटेड (जेएसबीसीएल)।





इन जिलों के पदाधिकारियों ने शिकायत की है।अधीक्षक उत्पाद देवघर, सहायक आयुक्त उत्पाद रामगढ़, अधीक्षक उत्पाद सह जिला प्रबंधक झारखंड राज्य बिवरेजेज कारपोरेशन लिमिटेड जामताड़ा, निरीक्षक उत्पाद सह प्रभारी पदाधिकारी जेएसबीसीएल पाकुड़, अधीक्षक उत्पाद कोडरमा, अधीक्षक उत्पाद सह जिला प्रबंधक जेएसबीसीएल गोड्डा, सहायक आयुक्त उत्पाद बोकारो।





उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग को वित्तीय वर्ष 2022-23 में 2200 करोड़ रुपए के राजस्व का लक्ष्य मिला है। बीते साल दिसंबर तक विभाग ने केवल 1300 करोड़ का ही राजस्व लक्ष्य पूरा किया है।बताया जा रहा है कि ब्रांडेड शराब की आपूर्ति सही तरह से न होने से राजस्व लक्ष्य का तेजी से पीछा किया जा सकेगा।





पूर्व में उत्पाद राजस्व में कमी के बाद उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग ने कम शराब की बिक्री करने वाले 11 जिलों को शो-काज किया था।इनमें धनबाद और रामगढ़ के सहायक उत्पाद आयुक्त के अलावा लोहरदगा, सिमडेगा, गढ़वा, पलामू, जामताड़ा, पाकुड़, गिरिडीह, सरायकेला-खरसांवा व पश्चिमी सिंहभूम के अधीक्षक उत्पाद शामिल थे।विभाग के दबाव के बावजूद राजस्व बहुत कम आ रहा है।





सरकार राज्य में बीते साल एक मई के बाद से नई उत्पाद नीति के तहत शराब बेच रही है। नई उत्पाद नीति को लागू करने के पीछे उद्देश्य ये था कि राज्य में लोगों को नकली शराब न मिले, गुणवत्ता ठीक हो, जिसकी पूरी निगरानी होगी। इससे राजस्व में भी वृद्धि होगी। वर्तमान में स्थिति इससे विपरीत है। निगरानी के मानक अब तक पूरे नहीं हो सके, कई मनचाहे ब्रांड के लिए लोग इंतजार करते रह गए और राजस्व का भी हाल बेहाल है।