मैथन।सितंबर महीने के आखिरी में आया चक्रवाती तूफान गुलाब और उसके बाद बंगाली की खाड़ी में बने लो प्रेशर की वजह से ओडिशा और पश्चिम बंगाल के साथ झारखंड में भी कई दिनों तक झमाझम बरसात हुई।झमाझम बरसात से झारखंड में दामोदर नदी पर बना पंचेत डैम और बराकर नदी पर स्थित मैथन डैम का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया।केंद्रीय जल आयोग के निर्देश पर दामोदर घाटी निगम ने मैथन और पंचेत डैम से पानी छोड़ना शुरू किया।डैम का पानी छोड़े जाने से पश्चिम बंगाल के निचले क्षेत्रों में बाढ़ आ गई और 22 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए।इसके बाद राजनीति शुरू हो गयी।पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बाढ़ के लिए डीवीसी और झारखंड सरकार पर हमला बोला।अब राहत की बात है कि मैथन और पंचेत डैम का जलस्तर कंट्रोल में आ गया है।पश्चिम बंगाल की तरफ कम पानी छोड़ा जा रहा है।



सितंबर महीने के आखिरी सप्ताह में चक्रवात की वजह से हुई भारी बारिश ने मैथन व पंचेत डैम के जलस्तर को काफी बढ़ा दिया था।ऊपरी हिस्से से दोनों ही डैम में जलजमाव बढ़ने से पंचेत डैम का जलस्तर खतरे के निशान से 4 फीट ऊपर बढ़कर 429 फीट तक पहुंच गया। मैथन डैम का जलस्तर भी खतरे के निशान के करीब 493 फीट तक पहुंच गया था।बारिश रूकने के बाद दोनों ही डैम में ऊपरी हिस्से से पानी का इनफ्लो कम होने के बाद जलस्तर कम होने लगा है।पंचेत डैम का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे 424 फीट के आसपास पहुंच गया है।मैथन डैम का जलस्तर भी 490 फीट से नीचे आ गया है।



ऊपरी हिस्से से पानी का इनफ्लो कम होने से इससे बंगाल की तरफ पानी छोड़ने की स्पीड कम कर दी गई है। दोनों ही डैम से 30,000 क्यूसेक ही पानी बंगाल की तरफ छोड़ा जा रहा है। मैथन डैम से मात्र 10 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है,जबकि 30 हजार क्यूसेक से कम पानी ऊपर से आ रहा है। पंचेत डैम से 20,000 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। दोनों ही डैम में हो रहे जलजमाव और छोड़े जा रहे पानी पर डीवीसी व केंद्रीय जल आयोग की टीम का नजर बनाए हुए है।