नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली में सोने और चांदी की कीमतों में जारी तेजी थमने का नाम नहीं ले रही है। मंगलवार को दिल्ली सर्राफा बाजार में सोने के भाव में ₹1,200 प्रति 10 ग्राम और चांदी में ₹2,000 प्रति किलोग्राम का जोरदार उछाल दर्ज किया गया। इस तेजी के साथ दोनों बहुमूल्य धातुएं अपने दो महीने के रिकॉर्ड उच्चतम स्तर (Highs) पर पहुंच गई हैं।
गौर करने वाली बात यह है कि भारतीय बाजार में यह उछाल ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बाजारों में सोने-चांदी में सुस्ती और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी देखी गई।
6 सत्रों में ₹9,800 उछला सोना, चांदी भी ऑल-टाइम हाइट्स के करीब
ऑल इंडिया सराफा एसोसिएशन के अनुसार, दिल्ली के बाजार में कीमती धातुओं का ताजा रुख इस प्रकार रहा:
- 99.9% शुद्ध सोना: सोमवार के ₹1,56,000 के मुकाबले ₹1,200 उछलकर ₹1,57,200 प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) पर बंद हुआ। इससे पहले 12 जून को यह ₹1,56,900 के स्तर पर था।
- बीते 6 कारोबारी सत्रों में सोना ₹1,47,400 (3 अगस्त) से बढ़कर ₹9,800 यानी 6.65% तक महंगा हो चुका है।
- चांदी: ₹2,000 की छलांग लगाकर ₹2,42,000 प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) पर पहुंच गई। 30 अप्रैल को चांदी ₹2,42,700 के स्तर पर बोली गई थी, जिसके बाद यह इसका सबसे उच्चतम स्तर है।
विदेशी बाजारों में विपरीत रुझान
घरेलू बाजार के विपरीत, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हाजिर सोना (Spot Gold) 0.38% गिरकर $4,373.43 प्रति औंस पर और चांदी लगभग 1.3% की गिरावट के साथ $64.90 प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी।
क्यों आई कीमतों में इतनी बड़ी तेजी?
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस अचानक आई तेजी के पीछे मुख्य रूप से निम्नलिखित कारण जिम्मेदार हैं:
- सुरक्षित निवेश की मांग (Safe-Haven Buying): अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति और ब्याज दरों के फैसले से पहले निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की ओर रुख कर रहे हैं।
- इंडस्ट्रियल डिमांड: औद्योगिक गतिविधियों से समर्थन मिलने के कारण चांदी की कीमतों को लगातार मजबूती मिल रही है।
- भू-राजनीतिक तनाव: होर्मुज स्ट्रैट में जारी गतिरोध और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता का माहौल है, जिससे सर्राफा को समर्थन मिल रहा है।
आगे कैसा रहेगा बाजार का मिजाज?
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में सोने और चांदी की चाल अमेरिकी महंगाई रिपोर्ट से तय होगी। बुधवार को जारी होने वाले अमेरिकी कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) और गुरुवार को आने वाले प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) के आंकड़े फेडरल रिजर्व के रुख को स्पष्ट करेंगे, जिससे कीमतों में आगे की दिशा तय होगी।





