रांची।मांडर उपचुनाव में चुनावी मुकाबला रोचक दिखाई दे रहा है।भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर वाला मांडर धीरे-धीरे त्रिकोणीय मुकाबले में बदलते हुए दिखाई दे रहा है।भाजपा के बागी पूर्व विधायक देव कुमार धान असद्दुदीन ओवैसी की पार्टी से उम्मीदवार बनकर चुनाव मैदान में कूद गए हैं।भाजपा ने देव कुमार को छह साल के लिए निलंबित कर दिया है।





एआईएमआईएम के अधिकृत उम्मीदवार देव कुमार धान क्षेत्र के पुराने नेता है। वर्ष 2000 के बाद से देव कुमार को चुनाव में कोई सफलता नहीं मिली है।भाजपा ने 2019 में अपने सीटिंग विधायक गंगोत्री कुजूर का टिकट काटकर देव कुमार को टिकट दिया था,लेकिन देव कुमार ये भी चुनाव हार गए।इस बार फिर देव कुमार की आस जगी,लेकिन भाजपा ने पूर्व विधायक गंगोत्री कुजूर पर भरोसा जताया है।कांग्रेस ने पूर्व विधायक बंधु तिर्की की बेटी शिल्पी नेहा पर भरोसा कर चुनावी मैदान में उतारा है। शिल्पी नेहा पहली बार राजनीति में अपनी किस्मत आजमा रही हैं।





आपको बताते चलें कि मांडर उपचुनाव कांग्रेस और सभी सत्ताधारी दलों के लिए प्रतिष्ठा बन चुका है।इससे पहले झारखंड में हुए तीन उपचुनावों में सत्ताधारी दल अपनी सीटिंग सीट पर जीत दर्ज करके भाजपा से आगे हैं।बेरमो और मधुपुर विधानसभा सीटें कांग्रेस और झामुमो के सीटिंग विधायकों के निधन से खाली हुई थीं।दुमका सीट मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जीत दर्ज करने के बाद छोड़ी थी।मांडर सीट बंधु तिर्की की थी।वह झाविमो के टिकट से चुनाव लड़कर जीते थे।उन्होंने चुनाव जीतने के बाद कांग्रेस की सदस्यता ले ली थी,लेकिन विधानसभा में अभी भी उन्हें कांग्रेस के सदस्य के रूप में मान्यता नहीं मिली थी।इस बीच उनकी सदस्यता भी खत्म हो गयी। इसलिए यह सीट कांग्रेस की न होकर बंधु तिर्की की मानी जायेगी।बंधु तिर्की इसे अपने लिए प्रतिष्ठामूलक सीट बना चुके हैं।बंधु तिर्की अपनी बेटी को राजनीतिक रूप से स्थापित करने के साथ-साथ अपनी परंपरागत सीट बचाए रखना चाहते हैं।





देव कुमार धान का चुनावी मैदान में होने से दोनों दलों के लिए चुनौती है।देव कुमार के पास अपने समर्थक और वोटर वर्ग हैं,कई पॉकेट में मतदाताओं को प्रभावित करने में सक्षम हैं,सभी वर्गों में समान रूप से अपनी पैठ रखते हैं।देखना होगा कि देव कुमार की चुनावी सक्रियता किसके पक्ष और किसके विपक्ष में होगी।देव कुमार आमने-सामने की लड़ाई को त्रिकोणीय बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।





भाजपा के लिए भी मांडर विधानसभा सीट बड़ी प्रतिष्ठा बन चुकी है।गंगोत्री कुजूर को अपना राजनीतिक वजूद कायम रखने के लिए सीट पर जीत पर जीत दर्ज करना बड़ी प्राथमिकता होगी।गंगोत्री ने टिकट न मिलने के बाद भी पांच साल तक क्षेत्र नहीं छोड़ा और लोगों के बीच रहीं।गंगोत्री की भी चुनावी अग्नि परीक्षा होनी है।भाजपा के प्रदेश नेतृत्व के लिए भी ये एक और अग्नि परीक्षा की घड़ी है। प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश और विधायक दल नेता बाबूलाल मरांडी को अपने नेतृत्व को फिर प्रमाणित करने की बारी है।





भाजपा ने देव कुमार धान को छह साल के लिए पार्टी से निलंबित कर दिया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सह सांसद दीपक प्रकाश के निर्देशानुसार प्रदेश महामंत्री बालमुकुंद सहाय ने देव कुमार धान को 6 साल के लिए भाजपा से निलंबित करने का पत्र जारी किया।बालमुकुंद सहाय ने बताया कि देव कुमार मांडर उपचुनाव में पार्टी की अधिकृत प्रत्याशी गंगोत्री कुजूर के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं। पार्टी ने देवकुमार धान के इस कार्य को अनुशासनहीनता मानते हुए उन्हें पार्टी से निलंबित किया है।देव कुमार धान साल 2019 में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं। उपचुनाव में टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने निर्दलीय पर्चा दाखिल किया था। बाद में देवकुमार धान ने एआईएमआईएम ज्वाइन कर लिया।