जमशेदपुर।अभी तक आप लोगों ने आमतौर पर देखा होगा कि केतली के ऊपर के ढक्कन को हटाते हुए चाय भरी जाती है।लेकिन आपकों ऐसी केतली की बारे में बताने जा रहे हैं।इस केतली के तल से चाय भरी जाती है।केतली को एक मिनट तक उलटा रखने के बाद चाय केतली में भर जाती है और फिर टोंटी से निकलती है।केतली के तल में कोई ढक्कन नही है। हम आप लोगों को कोई जादू का खेल नहीं, बस एक केतली की खासियत बता रहे हैं।



आइए जाने इसके बारे में



जमशेदपुर के उद्यमी अविनाश दुगड़ सर्किट हाउस एरिया में अपने टी-रेस्टोरेंट ला-ग्रेविटी में केतली का म्यूजियम बना रहे हैं।इस म्यूजियम में एक से बढ़कर एक खूबियों वाली आकार-प्रकार और रंगबिरंगी केतलियों का संग्रह है।हर केतली की अलग-अलग खूबी है। अविनाश ने हाल ही में कंबोडिया से चीनी मिट्टी ब्लू-व्हाइट पोर्सलीन की केतली मंगाई है।इस केतली का वजन 250 किलोग्राम है।अविनाश ने का दावा किया है कि ये भारत की सबसे बड़ी केतली है।इस केतली की लंबाई चार फुट चौड़ी-मोटी और चार फुट ऊंची है।अविनाश के पास सबसे छोटी छह इंच ऊंची एक केतली है, जिसकी टोंटी में लाइटर है।



अविनाश बताते हैं कि तल से चाय भरने वाली केतली चीन में बहुत लोकप्रिय है।इसे क्रैकल्ड टी-पॉट कहा जाता है।इस केतली में चाय तीन घंटे तक गर्म रहती है।अविनाश के पास जापान की ग्रीन पोर्सलीन वाली एक केतली है।इस केतली को जमशेदपुर की 78 वर्षीय महिला ने अविनाश को गिफ्ट दिया था।अविनाश के पास चीनी मिट्टी का कप है, जिसके तल में लड़की की आकृति ठीक उस तरह दिखायी देती है जैसे नोट में गांधी जी की पारदर्शी तस्वीर दिखायी देती है।



अविनाश बताते हैं कि फिलहाल 45 केतली हमारे पास एकत्र हो गई है, लेकिन दो-तीन महीने में केतली की संख्या 100 तक पहुंच जाएगी तब जमशेदपुर आने वालों को केतली का म्यूजियम देखने को मिलेगा, जो अब तक देश में नहीं है।बैरहाल टी-पॉट म्यूजियम में भारत के अलावा श्रीलंका, चीन, वियतनाम,कंबोडिया, जापान व टर्की की केतली है,जबकि अमेरिका, रूस व इंग्लैंड से आने वाली है।



अविनाश बताते है कि चीनी मिट्टी से बने क्रैकल्ड चाइना टी-पाॅट के तल से चाय भरी जाती है,जो एक पाइप के जरिए ऊपरी हिस्से से कुछ नीचे तक जाती है। पाइप का दूसरा सिरा पतला और नुकीला होता है, जिससे करीब एक मिनट केतली के बाकी हिस्से में चाय जमा हो जाती है। एक मिनट के बाद जब इसे सीधा रखा जाता है, तब चाय टोंटी से ही निकलती है तल से नहीं। इस केतली में करीब पांच कप चाय आती है। टी-रेस्टोरेंट में लगभग 150 तरह की चाय मिलती है,जो एक्सपोर्ट क्वालिटी की हैं।



अविनाश चाय के प्रति शौक को लेकर बताते हैं कि मुझे बचपन से चाय का शौक नही था।एक बार एडवेंचर स्पोर्ट्स के सिलसिले में सिंगापुर गया था तो वहां चाय की रेस्टोरेंट देखी थी।तभी से वही मेरे दिमाग में आया कि जमशेदपुर में क्यों न ऐसा ही रेस्टोरेंट खोला जाए।तब से मुझे दूसरों को चाय पिलाने में मजा आता है। घर-परिवार के अलावा दोस्तों के घर जाकर भी चाय बनाता हूं और पिलाता हूं।इसी कड़ी में 2016 में हमने कीनन स्टेडियम के पास चाय का ठेला लगाया। लोगों की सलाह पर उसी वर्ष टी-रेस्टोरेंट भी खोल दिया।