झारखंड के रामगढ़ जिले के रजरप्पा में रावण दहन के दौरान पुलिस और ग्रामीणों के बीच खूनी भिड़ंत हो गयी।घटना में पुलिस अधिकारी समेत कई पुलिस वाले घायल हो गये।बड़कीपोना गांव के लोग आने वाली मुसीबत से अनजान होकर अपने परिवार साथ रावण दहन कार्यक्रम को लेकर उत्साहित थे।शाम से पहले सैकड़ों लोग कार्यक्रम स्थल में पहुंच गए।पुलिस को जब इसकी जानकारी हुई तो सरकार की गाइडलाइन का पालन करवाने कार्यक्रम स्थल पर की गई।पुलिस ने आयोजकों से कहा कि आप सरकार के निर्देश का पालन करें। कहीं भी रावण दहन नहीं हुआ तो आप भी मत करें। पुलिस ने रावण दहन का आयोजन रोक दिया।
मौके पर मौजूद कई ग्रामीण पुलिस के बातों से सहमत थे लेकिन भीड़ में मौजूद कुछ शरारती लोगों को कुछ और ही मंजूर था। अचानक शरारती लोग पुलिस पर पथराव करने लगे।वहां पर मौजूद ग्रामीणों ने उनको रोकने की भी कोशिश की लेकिन शरारतियों ने पुलिस पर पथराव करना जारी रखा। इस घटना में पत्थर लगने से डीएसपी संजीव मिश्रा, इंस्पेक्टर विपिन कुमार, नरेंद्र कुमार, देवनारायण ठाकुर सहित 5 लोग घायल हुए हैं। जिनका इलाज सदर अस्पताल में चल रहा है। इसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की।पुलिस की कार्रवाई में कई ग्रामीणों को भी चोट आई है।घटना की जानकारी मिलने पर एसपी प्रभात कुमार पहुंचे और पथराव में शामिल आरोपियों की पकड़ने के लिए सर्च अभियान चलाया।
आपको बताते चलें कि शनिवार को बड़कीपोना में ग्रामीण रावण दहन कर रहे थे। रावण दहन की सूचना पर थाना प्रभारी पहुंचे और रावण दहन रोकने का निर्देश दिया,लेकिन ग्रामीणों ने कार्यक्रम रोकने से मना कर दिया।इसी बीच कुछ शरारतियों ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। जिससे थानेदार समेत कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। इसके बाद पुलिस ने जवाबी करवाई की। जिससे ग्रामीण भी घायल हो गए। घटना की सूचना मिलने के बाद रामगढ़ एसपी पहुंच गए और आरोपियों को पकड़ने के लिए सर्च अभियान जारी है।
एसपी प्रभात कुमार ने बताया कि नियम विरुद्ध रावण दहन रोकने पर उपद्रवियों ने पत्थरबाजी की है, जिसमें पुलिस पदाधिकारी और जवान घायल हुए हैं। घटनास्थल में मौजूद दस लोगों को हिरासत में लिया गया है। और अन्य लोगों को भी पकड़ने के लिए अभियान अभी भी जारी रहेगा। घटना को जिन लोगों ने अंजाम दिया है, उनको किसी भी हाल में बक्सा नहीं जाएगा।
घटना के बाद पुरा बड़कीपोना गांव पुलिस छावनी में तब्दील हो गया।हर तऱफ पुलिसकर्मी दिख रहे थे। गाँव के अधिकतर लोग अपने घरों के अंदर कैद हो गए थे। गांव में पुलिस को तैनात रखा गया है। गांव में भय और तनाव का माहौल बरकरार है।





