लखनऊ।उत्तर प्रदेश की राजनीति में चाचा भतीजे के बीच चल रही जंग और तेज हो चली है।विधानसभा चुनाव में चाचा भतीजे एक साथ आने के बाद भी सत्ता के करीब नहीं पहुंच पाए।उसके बाद प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के मुखिया शिवपाल सिंह यादव ने समाजवादी पार्टी के मुखिया भतीजे अखिलेश यादव के खिलाफ लगातार मोर्चा खोला हुआ है।राष्ट्रपति चुनाव से 40 घंटे पहले शिवपाल ने एक नए सियासी दांव की चाल चली है।शिवपाल ने अखिलेश को एक चिट्ठी लिखकर सूबे में सियासी हलचल बढ़ा दी है।शिवपाल ने चिट्ठी में लिखा है कि जिस व्यक्ति ने नेता जी (सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव) के बारे में अनर्गल बातें कही हो और उन्हें आईएसआई का एजेंट तक बताया हो उसको राष्ट्रपति चुनाव में समर्थन देने पर पुनर्विचार करना चाहिए।
अखिलेश यादव के साथ-साथ एक तरह से पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं को संदेश देने वाली शिवपाल की ये चिट्ठी सामने आई है जब राष्ट्रपति चुनाव में महज चंद घंटे बचे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या मुलायम को आईएसआई एजेंट बताने वाला यशवंत सिंहा का बयान वर्षों बाद अब उन्हें नुकसान पहुंचा सकता है।सपा की राजनीति को बेहद करीब से जानने वालों का कहना है कि अखिलेश यादव शायद ही शिवपाल की इस चिट्ठी का कोई जवाब दें या इसे ध्यान में रखते हुए अपना फैसला बदलें।ये बात शिवपाल भी जानते हैं,लेकिन लगातार संकेतों की सियासत कर रहे शिवपाल अखिलेश को घेरने का एक और मौका छोड़ना नहीं चाहते थे। शिवपाल ने खुली चिट्ठी के जरिए पार्टी कैडर को संदेश देने का अपना काम कर लिया है।
शिवपाल ने अपनी चिट्ठी को ट्विटर पर ट्वीट करते हुए लिखा है कि सपा के वर्तमान नेतृत्व ने राष्ट्रपति चुनाव में उस व्यक्ति का समर्थन किया है, जिसने हम सभी के अभिभावक और प्रेरणा व ऊर्जा के स्रोत आदरणीय नेताजी को आईएसआई का एजेंट बताया था। पार्टी नेतृत्व के इस फैसले के विरुद्ध मेरी घोर असहमति है। नेताजी के अपमान की शर्त पर कोई फैसला मंजूर नहीं।
शिवपाल ने चिट्ठी में आगे लिखा है कि यह नियति की अजीब विडंबना है कि समाजवादी पार्टी ने राष्ट्रपति चुनाव में ऐसे व्यक्ति का समर्थन किया। दुर्भाग्यपूर्ण है कि समाजवादी पार्टी को राष्ट्रपति प्रत्याशी के तौर पर एक अदद समाजवादी विरासत वाला नाम न मिला। यह कहते हुए मुझे दु:ख और क्षोभ हो रहा है कि जो समाजवादी कभी नेताजी के अपमान पर आग बबूला हो जाते थे, आज उसी विरासत के लोग नेताजी को अपमानित करने वलो व्यक्ति का राष्ट्रपति चुनाव में समर्थन कर रहे हैं।ऐसा लगने लगा है कि पूरी पार्टी मजाक का पात्र बनकर रह गई है।
शिवपाल ने अंत में अखिलेश को सम्बोधित करते हुए लिखा है कि प्रिय अखिलेश जी मुझे अपनी सीमाएं पता हैं।आप समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष हैं। ऐसे में मेरा सुझाव है कि उपरोक्त बिंदुओं के आलोक में अपने फैसले पर पुनर्विचार करें।
आपको बताते चलें कि हाल ही में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने एक अखबार की पुरानी कटिंग पोस्ट कर विपक्ष के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा के एक पुराने बयान का हवाला देते हुए अखिलेश द्वारा उनका समर्थन किए जाने पर सवाल उठाया था।





