रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज को लेकर बुधवार को बड़ा निर्णय लिया है।सीएम सोरेन ने नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज के अवधि विस्तार के प्रस्ताव को विचाराधीन प्रतीत नहीं होने के बिंदु पर अनुमोदन दे दिया है। 1964 में नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज की शुरुआत हुई थी। उसके बाद तत्कालीन बिहार सरकार ने 1999 में नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज की अवधि विस्तार किया था। सीएम सोरेन ने जनहित को ध्यान में रखते हुए नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज को पुनः अधिसूचित नहीं करने के प्रस्ताव पर सहमति प्रदान की है।नेतरहाट फील्ड फायरिंग पर रोक के बाद जनजातीय समुदाय में खुशी दिखाई दे रही है।





39 राजस्व गांव के ग्रामीणों ने राज्यपाल को सौंपा था ज्ञापन





नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज के विरोध में लातेहार जिले के लगभग 39 राजस्व गांवों द्वारा आमसभा के माध्यम से राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा गया था। ज्ञापन में नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज से प्रभावित जनता द्वारा बताया गया था कि लातेहार और गुमला जिला पांचवी अनुसूची के अन्तर्गत आता है।यहां पेसा एक्ट 1996 लागू है, जिसके तहत ग्राम सभा को संवैधानिक अधिकार प्राप्त है।





28 वर्ष से हो रहा आंदोलन





आपको बता दें कि राजधानी रांची से 170 किलोमीटर दूर छोटानागपुर की रानी नाम से प्रसिद्ध नेतरहाट के टुटुवापानी नामक स्थान में जल, जंगल, जमीन के लिए, लातेहार और गुमला के 245 गांव के हजारों आदिवासी पिछले 28 सालों से नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज की अधिसूचना रद्द करने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे थे। 1994 से हर वर्ष 22-23 मार्च को विरोध होता रहा है।वर्ष 1966 से सेना रुटीन तोपाभ्यास करती आ रही थी।लातेहार और गुमला जिले के 157 मौजों के 245 गांव की 1471 वर्ग किलोमीटर भूमि को अधिसूचित किया गया था। 1991-92 के बाद गांवों की संख्या और क्षेत्र का विस्तार किए जाने का विरोध व्यापक रूप से शुरू हुआ।





गांव से निकली आवाज आंदोलन में बदल गयी





दिसंबर 1993 में पायलट प्रोजेक्ट नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज विरोधी जन संघर्ष समिति नाम से एक संगठन बन गया। वर्ष 1994 में 22 से 27 मार्च के बीच सेना का रूटीन तोपाभ्यास तय था। 1991-92 और 1993 की अधिसूचना में बढ़ाई गई गांवों की संख्या को लेकर लोगों का दबा आक्रोश बाहर आया। 20 मार्च से ही जन संघर्ष समिति के बैनर तले फायरिंग रेंज के विरोध में लोगों की भारी भीड़ इकट्ठा होने लगी। एक सप्ताह तक चले इस जन-आंदोलन में सवा लाख ग्रामीण दिन-रात डटे रहे और सेना को 1994 में ग्रामीणों के दबाव पर अपनी गाड़ियों और तोपवाहन को लेकर वापस जाना पड़ा।





आंदोलन में क‌ई दिग्गज हुए शामिल





नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज की अधिसूचना रद्द करने के लिए आंदोलन में देश भर से कई हस्तियों ने अपनी सहभागिता निभाई।कई पत्रकार से लेकर लेखक भी इस आंदोलन में शामिल रहे है।इसी वर्ष किसान नेता राकेश टिकैत और माले विधायक विनोद सिंह ने 22 मार्च को नेतरहाट पहुंच कर ग्रामीणों का साथ दिया था।