प्रतिनिधि, मेदिनीनगर(पलामू )। पलामू जिले के विभिन्न प्रखंडों के 25 किसान बिहार के मोतिहारी जिले के पिपराकोठी स्थित महात्मा गांधी एकीकृत फार्मिंग रिसर्च संस्थान (आईसीएआर का संस्थान) में समेकित कृषि प्रणाली के गुर सीखे। अंतरराज्यीय प्रशिक्षण कार्यक्रम अंतर्गत पांच दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण प्राप्त कर किसान रविवार को पलामू लौटेंगे। आत्मा पलामू की ओर किसानों को टीम लीडर बीटीएम संजय कुमार के नेतृत्व में बिहार भेजा गया था। संस्थान के निदेशक मंडल से किसानों ने समेकित कृषि प्रणाली की सीख हासिल की। साथ ही किसानों ने इस पद्धति को अपनाकर अधिक आमदनी करने संबंधी जानकारी प्राप्त की। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को अपने उपलब्ध जमीन के आधार पर समेकित कृषि प्रणाली के विभिन्न मॉडल में से चुनाव कर कोई एक मॉडल अपनाने की सलाह दी।
प्रशिक्षण के दौरान तलाब आधारित आईएफएस मॉडल, पशु आधारित आईएफएस मॉडल, आईएफएस मॉडल में मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, फसलों के उत्पादन पैकेज, जलभराव से निपटने के लिए चावल, मछली, बत्तख, आईएफएस मॉडल इत्यादि के बारे में विदेशी पद्धति की जानकारी ली। आत्मा पलामू के किसानों ने संस्थान, अनुसंधान फार्म एवं कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा किए गए प्रत्यक्षण प्लॉट का भ्रमण भी किया। इस दौरान प्राकृतिक खेती के बारे में भी महत्वपूर्ण सुझाव ग्रहण किये।
प्रशिक्षण समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र, मुजफ्फरपुर के निदेशक डॉ. विकास दास ने किसानों को पलामू क्षेत्र में बागवानी के ऊपर विशेष जोर देने की बातें कही। उन्होंने बताया कि पलामू का क्षेत्र कीमती आम, लीची, अमरूद, पपीता, संतरा, नींबू इत्यादि फलों की खेती के लिए उपयुक्त है। इसलिए बागवानी कर किसान अच्छी आमदनी कर सकते है। आत्मा पलामू के बीटीएम संजय कुमार ने निदेशक आईसीएआर सहित अन्य के प्रति धन्यवाद किया। आईसीएआर के संस्थान में प्रशिक्षण के लिए बीटीएम संजय कुमार, आत्मा के लेखापाल मनोज कुमार के अलावा पलामू के किसान अमलेश कुमार सिंह, संजय यादव, अरविंद कुमार सिंह, मिथिलेश राय, रंजय कुमार सिंह, रामसुंदर मेहता आदि 25 किसान शामिल थे।
आईसीएआर महात्मा गांधी एकीकृत फार्मिंग रिसर्च सेंटर के निदेशक डॉ. केजी मंडल ने आत्मा पलामू के बीटीएम संजय कुमार को सम्मानित भी किया।प्रखंड कृषि पदाधिकारी पाटन तथा सहायक तकनीकी पदाधिकारी बिनय कुमार ने पलामू के प्रगतिशील कृषको दल मे शामिल कराया। चयनित किसान अपने अनुभव ग्रामीण किसानो को साझा करेगे।





