इस्लामाबाद/वॉशिंगटन:
पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्क रुबियो (Marco Rubio) के उस बयान को सिरे से खारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका केवल पाकिस्तान के परमाणु हथियारों के कारण उसके साथ संबंध बनाए रखने पर मजबूर है। पाकिस्तान ने इस टिप्पणी पर सफाई देते हुए अमेरिका के साथ अपने संबंधों को केवल सुरक्षा तक सीमित न बताकर व्यापार, निवेश और आपसी साझेदारी पर आधारित करार दिया है।
इसके साथ ही पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को लेकर एक बार फिर भारत के खिलाफ अपना पुराना रुख अपनाते हुए पानी के रुख को मोड़ने की किसी भी कोशिश को बेहद "खतरनाक" बताया है।
1. मार्क रुबियो के बयान पर पाकिस्तान की सफाई
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्क रुबियो की ओर से पाकिस्तान की परमाणु क्षमता को लेकर दिए गए बयान के बाद इस्लामाबाद में खलबली मच गई।
- पाकिस्तान का तर्क: पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि वाशिंगटन और इस्लामाबाद के बीच का रिश्ता महज रक्षा या परमाणु चिंताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि दोनों देश आर्थिक, व्यापारिक और निवेश के मोर्चे पर मजबूत सहयोगी हैं।
- भारत का नजरिया: भारतीय सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान का परमाणु बेड़ा और उसका गैर-जिम्मेदाराना रवैया लंबे समय से दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक स्थिरता के लिए एक बड़ा खतरा बना हुआ है।
2. सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान की बौखलाहट
सिंधु नदी के पानी के बंटवारे और भारत द्वारा अपनी नदियों के उपयोग को लेकर पाकिस्तान ने एक बार फिर आपत्ति जताई है।
- "पानी को हथियार बनाने" का आरोप: पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने तर्क दिया कि वह अपने हिस्से के पानी को किसी अन्य दिशा में मोड़ने (Divert) की अनुमति नहीं देगा। पाकिस्तान का दावा है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर "पानी को हथियार के रूप में इस्तेमाल करना" एक खतरनाक मिसाल कायम करता है।
- भारत का सख्त और स्पष्ट रुख: भारत ने सिंधु जल संधि और पाकिस्तान से प्रायोजित सीमा पार आतंकवाद को लेकर हमेशा अपना रुख साफ रखा है। भारत का स्पष्ट मानना है कि "खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते।" भारत अपने राष्ट्रीय हितों, संप्रभु अधिकारों और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए अपने जल संसाधनों के पूर्ण उपयोग की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
एक तरफ जहां पाकिस्तान अमेरिका के नए नेतृत्व के सामने खुद को एक व्यापारिक भागीदार के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ भारत के कड़े रुख और जल संसाधनों पर अपनी रणनीतिक नीतियों के चलते इस्लामाबाद में बौखलाहट साफ नजर आ रही है।
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