प्रतिनिधि,दुमका।दिसोम मांझी थान दुमका परिसर में शनिवार को दिसोम मांझी बाबा विशाल मरांडी की अध्यक्षता में दिसोम बेलबोरोन पूजा -अर्चना किया गया। बेलबोरोन पूजा गुरु बाबा देवीशल मुर्मू की अगुवाई में संपन्न किया गया। ये पर्व दासांय चांदो (अश्विन माह) में मनाया जाता है।





दासांय पोरोब संताल आदिवासियों का सबसे बड़ा एवं पुराना पर्व है। इस पर्व की शुरुआत कुंवर दिसोम कामरू दिसोम से हुआ है।दासांय गीत और नृत्य में प्रयोग होने वाला सबसे पुराना वाद्ययंत्र भुवाड़ है। इस पर्व में गुरु के घर या आखड़ा में चेलाओं को विभिन्न प्रकार के मांतार-बाखेंड़, रान-मुरगा़न, झरनी-मांतार, सेरेञ आदि सिखाया जाता है। साथ ही दासांय नृत्य में पुरुषों का टोली स्त्रियों का वेष धारण कर नयन एवं काजोल नामक दो वीरांगनाओं की खोज में गांव-गांव, घर-घर जाते हैं। बेलबोरोन के दिन सभी चेलों को सिद्धि देते हैं और इसके बाद ही दासांय नाच हेतु घर-घर जाते हैं। इस पूजा में संताल परगना प्रमंडल के सभी जिलों से संताल आदिवासी समुदाय के लोग अपने पारंपरिक पंची-लूंगी में शामिल हुए।





इस बेलबोरोन पूजा में संताली साहित्यकार चुंडा सोरेन सिपाही, अमिताभ बच्चन सोरेन, इंद्रजीत हेंब्रम, लखींद्र मुर्मू, अमरदीप हांसदा, सुरेशचंद्र सोरेन, टेकलाल मरांडी, निलेश हांसदा, सीताराम सोरेन, मोहन टुडू, बिनीलाल टुडू, मुकेश आरडीएक्स टुडू, सीमांत हांसदा, प्रेम हांसदा, शिवशंकर सोरेन, झुमरी सोरेन, अंजनी बेसरा, पिंकी किस्कू, अनिता हेंब्रम, सुनीता सोरेन, संगीता मुर्मू आदि सैकड़ों की संख्या में मौजूद थे।