मुंबई। जून 2020 में अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की संदिग्ध परिस्थिति में हुई मौत का मामला एक बार फिर गरमा गया है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुंबई पुलिस की जांच प्रक्रिया पर उठे सवालों के बाद इस केस की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपने का आदेश दिया है।
हाई कोर्ट के जस्टिस सारंग कोटवाल और जस्टिस रंजीत सिन्हा भोंसले की पीठ ने दिशा के पिता सतीश सालियान की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया।
आखिर मुंबई पुलिस से छीनकर CBI को क्यों सौंपी गई जांच?
हाई कोर्ट में जिरह के दौरान याचिकाकर्ता के वकील और दिशा के पिता द्वारा रखे गए 5 मुख्य तर्कों के आधार पर कोर्ट ने जांच सीबीआई को सौंपने का निर्णय लिया:
- पोस्टमार्टम रिपोर्ट में देरी: दिशा के परिजनों को पोस्टमार्टम रिपोर्ट समय पर नहीं दी गई। याचिकाकर्ता का आरोप है कि पुलिस की लापरवाही के कारण अदालत के हस्तक्षेप के बाद 5 साल बाद उन्हें यह रिपोर्ट प्राप्त हुई।
- FIR दर्ज करने में लापरवाही: मामले में शुरुआत से ही प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने में टालमटोल की गई। कोर्ट ने भी माना कि पुलिस को घटना के तुरंत बाद एफआईआर दर्ज कर आपराधिक जांच शुरू करनी चाहिए थी।
- मुख्य संदिग्धों के नाम छोड़ना: दिशा के पिता का आरोप है कि उन्होंने एफआईआर के लिए जिन प्रमुख लोगों के नाम दिए थे, पुलिस ने उन्हें शामिल नहीं किया और न ही उन संदिग्धों से पूछताछ की।
- 5 साल तक ADR पर जांच: याचिकाकर्ता के वकील ने सवाल उठाया कि पुलिस आखिर 5 साल से केवल 'एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट' (ADR) के तहत ही जांच क्यों खींच रही थी और इसे आधिकारिक तौर पर क्लोज या निष्पादित क्यों नहीं किया गया।
- रेप और हत्या का अंदेशा: दिशा के परिजनों को मुंबई पुलिस की 'सुसाइड/हादसा' वाली थ्योरी पर भरोसा नहीं है। उनका दावा है कि दिशा के साथ पहले दुष्कर्म किया गया और फिर उसकी हत्या कर दी गई, जिसे पुलिस दबाने की कोशिश कर रही थी।
बॉम्बे हाई कोर्ट के 2 सख्त दिशानिर्देश
सुनवाई के दौरान शिवसेना (UBT) के विधायक आदित्य ठाकरे, मुंबई पुलिस (राज्य सरकार) और दिशा के पिता के वकीलों ने अपनी-अपनी दलीलें रखीं। अदालत ने मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सीबीआई को जांच सौंपते हुए 2 मुख्य निर्देश जारी किए:
- वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा जांच: सीबीआई के वरिष्ठ स्तर के अधिकारी इस पूरे मामले की नए सिरे से गहन जांच करेंगे। जांच में जब तक कोई ठोस और पुख्ता सबूत नहीं मिल जाता, तब तक बिना प्रक्रिया पूरी किए किसी को भी सीधा आरोपी नहीं बनाया जाएगा।
- केस क्लोजर का नियम: यदि जांच पूरी होने के बाद भी कोई आपराधिक सबूत सामने नहीं आता है, तो सीबीआई विधिवत तरीके से अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर केस बंद करने की अर्जी देगी।
क्या था पूरा मामला?
8 जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में स्थित एक आवासीय इमारत की 14वीं मंजिल से गिरकर 28 वर्षीय दिशा सालियान की मौत हो गई थी। मुंबई पुलिस ने इसे एक दर्घटना या आत्महत्या करार दिया था, जबकि दिशा के परिवार का कहना है कि यह एक सोची-समझी हत्या थी। इस घटना के ठीक 6 दिन बाद, 14 जून 2020 को अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत भी अपने बांद्रा स्थित फ्लैट में मृत पाए गए थे, जिसके कारण दोनों मामलों के आपसी तार जुड़े होने के कयास लगाए जाते रहे हैं।





