नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल दर्ज किया गया है। ग्लोबल सप्लाई बाधित होने की आशंका के बीच ब्रेंट क्रूड 1.94% बढ़कर $96 प्रति बैरल के पार निकल गया है, जबकि अमेरिकी क्रूड (WTI) $92 प्रति बैरल से ऊपर कारोबार कर रहा है।
क्यों भड़का बाजार और क्या हैं तनाव के कारण?
- सैन्य स्ट्राइक और पलटवार: अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने का आरोप लगाते हुए ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमले किए। इसके जवाब में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने जॉर्डन, बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य अड्डों पर मिसाइल दागने का दावा किया है।
- ऊर्जा मार्ग पर संकट: वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा इसी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर गुजरता है। IRGC ने चेतावनी दी है कि अमेरिकी कार्रवाई जारी रहने पर तेल टैंकरों का रास्ता पूरी तरह रोक दिया जाएगा।
- थिंक टैंक का आकलन: डच थिंक टैंक ING ग्रुप और ग्लोबल फाइनेंशियल ग्रुप MUFG के अनुसार, होर्मुज में रिस्क प्रीमियम बना रहेगा, जिससे शिपिंग कंपनियां वहां से जहाज निकालने में झिझक रही हैं।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व और वैश्विक महंगाई पर असर
CME फेडवॉच टूल के मुताबिक, क्रूड की ऊंची कीमतों से महंगाई बढ़ने की चिंता गहरा गई है:
- ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका: 66% ट्रेडर्स का अनुमान है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व आगामी सितंबर बैठक में ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर सकता है। (पिछले हफ्ते यह अनुमान केवल 40% था)।
भारत पर प्रभाव: कोटक सिक्योरिटीज का 4-पॉइंट एनालिसिस
कोटक सिक्योरिटीज के कमोडिटी एंड रिसर्च हेड अनिंद्या बनर्जी के अनुसार, भारत पर इस स्थिति का असर निम्नलिखित 4 बिंदुओं में समझा जा सकता है:
- सप्लाई की कमी और मार्जिन: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका में डीजल स्टॉक औसतन 14% कम है और रिफाइनरियां पूर्ण क्षमता पर काम कर रही हैं। डीजल रिफाइनिंग मार्जिन $100/बैरल से ऊपर पहुंच गया है, जो सामान्यतः $15-$25 होता है।
- क्रूड ऑयल प्राइस टारगेट: ब्रेंट क्रूड के लिए $98 पर पहला रेजिस्टेंस और $92 व $90 पर मजबूत सपोर्ट है। सबसे बड़ी रुकावट $100-$102 के जोन में है। यदि भाव $102 के पार निकलता है, तो कीमतें $120/बैरल तक जा सकती हैं।
- रुपये की स्थिति: भारतीय रुपये को 94.60-94.70 के स्तर पर मजबूत सहारा हासिल है। भारत के $729 बिलियन के रिकॉर्ड विदेशी मुद्रा भंडार, 7.8% की जीडीपी ग्रोथ और विदेशी निवेश के दम पर रुपया फिलहाल 94.70 और 95.40 के दायरे में बना रहेगा। 94.70 के नीचे बंद होने पर अगला सपोर्ट 94 पर होगा।
- महंगाई का खतरा: क्रूड के लंबे समय तक $96 से ऊपर बने रहने पर भारत के आयात बिल में बढ़ोतरी होगी, जिससे घरेलू स्तर पर ईंधन और लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ने का जोखिम है।





