नई दिल्ली: देश में खुदरा महंगाई और खाद्य पदार्थों की कीमतों में आए हालिया उछाल का सीधा असर आम आदमी की रसोई पर देखने को मिल रहा है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल (CRISIL) की ताजा 'ब्रेड राइस रेट' (Bread Rice Rate) रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई महीने में जहां शाकाहारी (Veg) थाली तैयार करना महंगा हो गया, वहीं मांसाहारी (Non-Veg) थाली की कीमत में गिरावट दर्ज की गई है।

महीने-दर-महीने (MoM) थाली की कीमतों में बदलाव

कच्चे माल की कीमतों के आधार पर घर में तैयार होने वाली थाली की औसत लागत के आंकड़े:

  • शाकाहारी थाली: जून के ₹27.1 से 4% बढ़कर ₹28.1 हो गई।
  • मांसाहारी थाली: जून के ₹54.8 से 2% घटकर ₹53.5 पर आ गई।
सालाना आधार पर राहत: हालांकि, अगर पिछले साल (जुलाई 2023) से तुलना करें, तो शाकाहारी थाली की लागत में 14% और मांसाहारी थाली की कीमत में 13% की कमी दर्ज की गई है, जो पिछले साल के उच्च स्तर के मुकाबले कीमतों में स्थिरता को दर्शाती है।

क्यों महंगी हुई वेज थाली?

शाकाहारी थाली की लागत बढ़ाने में रसोई की तीन प्रमुख सब्जियों—टमाटर, प्याज और आलू (TOP)—की अहम भूमिका रही:

  1. टमाटर में भारी उछाल: मॉनसून के दौरान मौसमी सप्लाई प्रभावित होने से बाजार में टमाटर की आवक में 27% की कमी आई, जिसके चलते जुलाई में टमाटर की कीमतें 31% तक बढ़ गईं
  2. प्याज और आलू भी हुए महंगे: जुलाई के दौरान आलू की कीमतों में 2% और प्याज के दामों में 5% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

क्यों सस्ती हुई नॉन-वेज थाली?

मांसाहारी थाली की कुल लागत का लगभग आधा हिस्सा ब्रॉयलर चिकन (Broiler Chicken) से तय होता है।

  • मांग में गिरावट: जुलाई में सावन के महीने की शुरुआत और मॉनसून के कारण देश भर में मांस की मांग में बड़ी कमी आई, क्योंकि कई लोग इस अवधि में मांसाहार का सेवन बंद कर देते हैं।
  • चिकन के दाम घटे: मांग कम होने से ब्रॉयलर चिकन की कीमतों में महीने-दर-महीने आधार पर 9% और सालाना आधार पर 12% की गिरावट दर्ज की गई, जिससे नॉन-वेज थाली सस्ती हो गई।