प्रयागराज।विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन महाकुंभ सनातन धर्म के सबसे बड़े और सबसे पवित्र धार्मिक आयोजनों में से एक है।महाकुंभ न केवल भारतीय संस्कृति और अध्यात्म का उत्सव है,बल्कि ये दुनिया में सनातन धर्म की महत्ता को बताता है।गंगा,यमुना और सरस्वती की निर्मल धारा में आस्था की डुबकी लगाने के लिए दुनिया भर से करोड़ों श्रद्धालु आ रहे हैं।भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने बुधवार को महाकुंभ नगर में टेंट सिटी की पहले और बाद की सैटेलाइट तस्वीरें जारी की है जो महाकुंभ की भव्यता की झलक दिखाती हैं। बता दें कि महाकुंभ 13 जनवरी से शुरू जो 26 फरवरी तक चलेगा।
इसरो ने सैटेलाइट से ली गई तस्वीरों में संगम के पास मेले में बनाए गए विशाल बुनियादी ढांचे को दिखाया गया है।ये तस्वीरें EOS-04 (RISAT-1A) ‘C’ बैंड माइक्रोवेव सैटेलाइट द्वारा ली गई हैं। अंतरिक्ष से इसरो की तस्वीरें दिखाती हैं कि महाकुंभ में लाखों श्रद्धालुओं ने संगम में आस्था की डुबकी लगाई और विशाल मेला लगा है।
एक आंकड़े के अनुसार अब तक 8 करोड़ से अधिक श्रद्धालु संगम में आस्था की डुबकी लगा चुके हैं। इसरो ने बताया कि ईओएस-04 (आरआईसैट-1ए) 'सी' बैंड माइक्रोवेव सेटेलाइट की टाइम सीरीज तस्वीरें 15 सितंबर 2023 और 29 दिसंबर 2024 की हैं।
इसरो ने एक बयान में कहा कि ईओएस-04 (आरआईसैट-1ए) ‘सी’ बैंड माइक्रोवेव सैटेलाइट की टाइम सीरीज तस्वीरें (15 सितंबर 2023 और 29 दिसंबर 2024)...महाकुंभ मेला 2025 के लिए स्थापित की जाने वाली टेंट सिटी (संरचनाओं और सड़कों का लेआउट) के विवरण के साथ-साथ पुलों और सहायक बुनियादी ढांचे के नेटवर्क पर अनूठी जानकारी प्रदान करती हैं।
सैटेलाइट द्वारा खींची गईं तस्वीरों में प्रयागराज में भारत की आकृति वाले शिवालय पार्क का निर्माण दिखाया गया है, जो 12 एकड़ भूमि में फैला है और इसे प्रमुख आकर्षण के रूप में डिजाइन किया गया है। तीन अलग-अलग तारीखों पर ली गई तस्वीरों में इस महत्वपूर्ण स्थल के निर्माण को दिखाया गया है।
राष्ट्रीय सुदूर संवेदी केंद्र (NSRC) की वेबसाइट पर संगम की टाइम सीरीज तस्वीरें भी साझा की गईं, जिनसे सितंबर 2023 और 29 दिसंबर, 2024 को ली गईं तस्वीरों में अंतर दिखाई देता है।
आपको बता दें कि महाकुम्भ में श्रद्धालुओं ने सभी रिकॉर्ड ध्वस्त करते हुए मकर संक्रांति पर पहले अमृत स्नान के दिन ही लगभग 3.5 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम में आस्था की डुबकी लगाई।मेला प्राधिकरण का अनुमान है कि मौनी अमावस्या के दिन 10 करोड़ से अधिक श्रद्धालु संगम में आस्था की डुबकी लगा सकते हैं।





